Part VI - The States • अनुच्छेद
अनुच्छेद 216 Simplified: उच्च न्यायालयों का गठन
अनुच्छेद 216 परिभाषित करता है कि उच्च न्यायालय (High Court) का गठन कैसे होता है: प्रत्येक उच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) और ऐसे अन्य न्यायाधीश होंगे जिन्हें राष्ट्रपति (President) समय-समय पर नियुक्त करना आवश्यक समझें। न्यायाधीशों की कोई निश्चित अधिकतम संख्या नहीं है—राष्ट्रपति न्यायालय के कार्यभार के आधार पर संख्या बढ़ा या घटा सकते हैं। यह लचीलापन सरकार को संविधान में संशोधन किए बिना मुकदमों के बैकलॉग (लंबित मामलों) से निपटने की अनुमति देता है।
Official Text
उच्च न्यायालयि का गठन–प्रत्येक उच्च न्यायालय मु ख्य न्यायमू तिर् और ऐसे अन्य न्यायाधीशि से मिलकर बनेगा िजन्हि राष्ट्रपति समय-समय पर नियु क्त करना आवश्यक समझे । * * * *
Simple Meaning
अनुच्छेद 216 परिभाषित करता है कि उच्च न्यायालय (High Court) का गठन कैसे होता है: प्रत्येक उच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) और ऐसे अन्य न्यायाधीश होंगे जिन्हें राष्ट्रपति (President) समय-समय पर नियुक्त करना आवश्यक समझें। न्यायाधीशों की कोई निश्चित अधिकतम संख्या नहीं है—राष्ट्रपति न्यायालय के कार्यभार के आधार पर संख्या बढ़ा या घटा सकते हैं। यह लचीलापन सरकार को संविधान में संशोधन किए बिना मुकदमों के बैकलॉग (लंबित मामलों) से निपटने की अनुमति देता है।
Explain Like Ten
यदि किसी अस्पताल में अधिक मरीज आते हैं, तो आपको अधिक डॉक्टरों की आवश्यकता होती है। अनुच्छेद 216 सरकार को किसी उच्च न्यायालय (High Court) में अधिक न्यायाधीशों को जोड़ने की अनुमति देता है जब वहां मामले बढ़ते हैं—इसकी कोई निश्चित सीमा नहीं है। प्रत्येक उच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए, और राष्ट्रपति कार्यभार की मांग के अनुसार अतिरिक्त न्यायाधीशों को जोड़ सकते हैं।
Student Mode
अनुच्छेद 216 लचीले उच्च न्यायालय गठन की स्थापना करता है: मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) + ऐसे अन्य न्यायाधीश जिन्हें राष्ट्रपति (President) आवश्यक समझें। कोई संवैधानिक अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है, जिससे कार्यपालिका को मुकदमों के बैकलॉग के जवाब में उच्च न्यायालय की क्षमता बढ़ाने की अनुमति मिलती है। यह उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) से भिन्न है जहाँ अनुच्छेद 124 ने मूल रूप से एक सीमा तय की थी (बाद में संसद द्वारा बढ़ाई गई)। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या राष्ट्रपति द्वारा सिफारिशों के आधार पर निर्धारित की जाती है, और इसमें स्थायी, अतिरिक्त (अनुच्छेद 224), और कार्यकारी न्यायाधीश शामिल होते हैं।
Example
इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)—जो भारत का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है—में मामलों के लंबित रहने के कारण राष्ट्रपति के आदेश से न्यायाधीशों की संख्या कई बार बढ़ाई गई है। जब किसी उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की बाढ़ आ जाती है, तो राष्ट्रपति उनकी सुनवाई के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त कर सकते हैं। 'ऐसे अन्य न्यायाधीश जिन्हें राष्ट्रपति आवश्यक समझें' भाषा पूरी तरह से लचीलापन प्रदान करती है।
Key Takeaway
अनुच्छेद 216 उच्च न्यायालयों के गठन को एक मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रपति द्वारा तय किए गए अतिरिक्त न्यायाधीशों के रूप में निर्धारित करता है—जिससे कार्यपालिका को कार्यभार के आधार पर न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की लचीली शक्ति मिलती है।
FAQs
क्या किसी उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कोई अधिकतम संख्या हो सकती है?
कोई संवैधानिक अधिकतम सीमा मौजूद नहीं है। राष्ट्रपति कार्यभार के आधार पर संख्या तय करते हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)—भारत का सबसे बड़ा—में स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या विभिन्न समय पर 160 से अधिक रही है।
अनुच्छेद 216 के तहत स्थायी न्यायाधीश और अतिरिक्त न्यायाधीश (Additional Judge) में क्या अंतर है?
अतिरिक्त न्यायाधीशों को अनुच्छेद 224 के तहत अस्थायी अवधि (अधिकतम 2 वर्ष) के लिए नियुक्त किया जाता है जब कार्यों या लंबित मुकदमों में अस्थायी वृद्धि होती है। वे समान न्यायिक कार्य करते हैं लेकिन सीमित समय के लिए। स्थायी न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक सेवा करते हैं।
Quiz
अनुच्छेद 216 के तहत, यह कौन तय करता है कि उच्च न्यायालय में कितने न्यायाधीश होने चाहिए?
Answer: राष्ट्रपति (The President)
अनुच्छेद 216 के तहत, प्रत्येक उच्च न्यायालय में अनिवार्य रूप से कौन सा अधिकारी होना चाहिए?
Answer: एक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice)