Part VI - The States • अनुच्छेद
अनुच्छेद 210 Simplified: विधानमंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा
अनुच्छेद 210 राज्य विधानमंडलों के लिए भाषा के नियम निर्धारित करता है। विधायी कार्य राज्य की आधिकारिक भाषा (या भाषाओं), हिंदी या अंग्रेजी में संचालित किया जाना चाहिए। अंग्रेजी के विकल्प को 15 वर्षों के बाद (1965 तक) समाप्त किया जाना था, लेकिन अधिकांश राज्यों ने कानून पारित करके अंग्रेजी का उपयोग जारी रखा है। इसमें एक मानवीय अपवाद भी है: यदि कोई सदस्य इन भाषाओं में से किसी में भी स्वयं को व्यक्त करने में असमर्थ है, तो विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) या सभापति उन्हें अपनी मातृभाषा (Mother-tongue) में बोलने की अनुमति दे सकते हैं।
Official Text
विधान-मंडल मि प्रयोग कि जाने वालि भाषा–(1) भाग 17 मि किसी बात के होते हु ए भी, किन्तु अनु च्छेद 348 के उपबंधि के अधीन रहते हु ए, राज्य के विधान-मंडल मि कायर् राज्य कि राजभाषा या राजभाषाओं मि या हिंदि मि या अंग्रेजी मि किया जाएगा : परंतु , यथािस्थति, विधान सभा का अध्यि या विधान परिषद् का सभापति अथवा उस रूप मि कायर् करने वाला व्यिक्त किसी सदस्य को, जो पू वकि्त भाषाओं मि से किसी भाषा मि अपनी पयार्प्त अभिव्यिक्त नहीं कर सकता है, अपनी मातृ भाषा मि सदन को संबोधित करने कि अनु िा दे सकेगा । (2) जब तक राज्य का विधान-मंडल विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक इस संविधान के प्रारंभ से पंद्रह वषर् कि अवधि कि समािप्त के पश्चात ् यह अनु च्छेद ऐसे प्रभावी होगा मानो “या अंग्रेजी मि ” शब्दि का उसमि से लोप कर दिया गया हो : [परंतु [हिमाचल प्रदेश, मणिपु र, मेघालय और ति्रपु रा राज्यि के विधान-मंडलि] के संबंध मि यह खंड इस प्रकार प्रभावी होगा मानो इसमि आने वाले “पंद्रह वषर्” शब्दि के स्थान पर “पच्चीस वषर्” शब्द रख दिए गए हि :] [परंतु यह और कि [ [अरुणाचल प्रदेश, गोवा और मिजोरम राज्यि के विधान- मंडलि]] के संबंध मि यह खंड इस प्रकार प्रभावी होगा मानो इसमि आने वाले “पंद्रह वषर्” शब्दि के स्थान पर “चालसि वषर्” शब्द रख दिए गए हि ।] 1. हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम, 1970 (1970 का 53) कि धारा 46 द्वारा ( 25- 1-1971 से ) अंतःस्थापित । 2. पू विरि िेत्र (पु नगर्ठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) कि धारा 71 द्वारा (21- 1-1972 से) “हिमाचल प्रदेश राज्य के विधान-मंडल” के स्थान पर प्रतिस्थापित । 3. मिजोरम राज्य अधिनियम, 1986 (1986 का 34) कि धारा 39 द्वारा ( 20- 2-1987 से) अंतःस्थापित । 4. अरुणाचल प्रदेश राज्य अधिनियम, 1986 (1986 का 69) कि धारा 42 द्वारा (20- 2-1987 से) “मिजोरम राज्य के विधान-मंडल” के स्थान पर प्रतिस्थापित । 5. गोवा, दमण और दवि पु नगर्ठन अधिनियम, 1987 (1987 का 18) कि धारा 63 द्वारा (30- 5-1987 से) “अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
Simple Meaning
अनुच्छेद 210 राज्य विधानमंडलों के लिए भाषा के नियम निर्धारित करता है। विधायी कार्य राज्य की आधिकारिक भाषा (या भाषाओं), हिंदी या अंग्रेजी में संचालित किया जाना चाहिए। अंग्रेजी के विकल्प को 15 वर्षों के बाद (1965 तक) समाप्त किया जाना था, लेकिन अधिकांश राज्यों ने कानून पारित करके अंग्रेजी का उपयोग जारी रखा है। इसमें एक मानवीय अपवाद भी है: यदि कोई सदस्य इन भाषाओं में से किसी में भी स्वयं को व्यक्त करने में असमर्थ है, तो विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) या सभापति उन्हें अपनी मातृभाषा (Mother-tongue) में बोलने की अनुमति दे सकते हैं।
Explain Like Ten
एक ऐसे स्कूल की कल्पना करें जहाँ कक्षाएं स्थानीय भाषा, हिंदी या अंग्रेजी में से किसी एक में पढ़ाई जानी चाहिए। लेकिन यदि कोई छात्र इनमें से किसी को भी ठीक से नहीं बोल पाता है, तो शिक्षक उसे अपनी घरेलू भाषा में उत्तर देने की अनुमति दे सकते हैं। अनुच्छेद 210 राज्य विधानसभा के सदस्यों के लिए भी इसी तरह काम करता है—उन्हें राज्य की आधिकारिक भाषा, हिंदी या अंग्रेजी में बोलना चाहिए, लेकिन यदि वे दूसरों में सहज नहीं हैं तो विधानसभा अध्यक्ष उन्हें अपनी मातृभाषा में बोलने की अनुमति दे सकते हैं।
Student Mode
अनुच्छेद 210 संसद के भाषा संबंधी अनुच्छेद 120 को दर्शाता है। मुख्य नियम: (1) राज्य विधानमंडल का कार्य राज्य की राजभाषा, हिंदी या अंग्रेजी में होगा; (2) अंग्रेजी को 15 वर्षों (1965 तक) के बाद चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना था, लेकिन राज्य इसे जारी रखने के लिए कानून बना सकते हैं; (3) कुछ राज्यों के लिए विशेष विस्तारित अवधियां: हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा के लिए 25 वर्ष; अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम के लिए 40 वर्ष; (4) अध्यक्ष/सभापति अपवाद: कोई भी सदस्य जो निर्धारित भाषाओं में खुद को व्यक्त नहीं कर सकता, उसे अपनी मातृभाषा में बोलने की अनुमति दी जा सकती है।
Example
तमिलनाडु विधानसभा (Tamil Nadu Assembly) में कार्यवाही तमिल (राजभाषा), हिंदी या अंग्रेजी में आयोजित की जा सकती है। एक बुजुर्ग आदिवासी विधायक (MLA) जो स्थानीय बोली में सबसे अधिक सहज है, विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति से सदन को उस भाषा में संबोधित कर सकता है। जब तमिलनाडु ने 1965 के बाद अंग्रेजी का उपयोग जारी रखने का कानून पारित किया, तो उस कानून ने चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने वाले खंड को ओवरराइड कर दिया।
Key Takeaway
अनुच्छेद 210 राज्य विधानमंडल के कार्यों को आधिकारिक राज्य भाषा, हिंदी या अंग्रेजी में करना अनिवार्य बनाता है—एक अपवाद के साथ जो किसी भी सदस्य को अध्यक्ष की अनुमति से अपनी मातृभाषा में बोलने की अनुमति देता है।
FAQs
संविधान में राज्य विधानमंडलों में अंग्रेजी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रावधान क्यों किया गया था?
संविधान निर्माताओं का इरादा था कि भारत के भाषाई रूप से आत्मनिर्भर होने के साथ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय भाषाएं धीरे-धीरे अंग्रेजी का स्थान ले लें। हालांकि, शासन की व्यावहारिक आवश्यकताओं, कानूनी मसौदा तैयार करने और अंतर-राज्यीय संचार ने अधिकांश राज्यों को विधायी विस्तार के माध्यम से अंग्रेजी बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
क्या कोई विधायक हमेशा अपनी मातृभाषा में बोलने की मांग कर सकता है?
नहीं। यह अधिकार पूर्ण नहीं है—इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) या सभापति की अनुमति की आवश्यकता होती है। अध्यक्ष के पास विवेक होता है और वे आमतौर पर तब इसकी अनुमति देते हैं जब सदस्य वास्तव में निर्धारित भाषाओं में खुद को व्यक्त करने में असमर्थ होता है।
Quiz
अनुच्छेद 210 के तहत, राज्य विधानमंडल के किसी सदस्य को उसकी मातृभाषा में बोलने की अनुमति कौन दे सकता है?
Answer: अध्यक्ष या सभापति (Speaker or Chairman)
अनुच्छेद 210(2) के तहत राज्य विधानमंडलों में अंग्रेजी भाषा का विकल्प मूल रूप से कितने वर्षों के बाद समाप्त होने के लिए निर्धारित था?
Answer: 15 वर्ष