Part VI - The States • अनुच्छेद
अनुच्छेद 201 Simplified: विचार के लिए आरक्षित विधेयक
यह नियंत्रित करता है कि जब राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति (President) के लिए आरक्षित करते हैं तो क्या होता है। राष्ट्रपति के पास दो विकल्प होते हैं: (1) अनुमति देना—विधेयक कानून बन जाता है; (2) अनुमति रोकना—विधेयक समाप्त हो जाता है। गैर-धन विधेयकों के लिए, राष्ट्रपति राज्यपाल को विधेयक वापस भेजने का निर्देश दे सकते हैं। यदि विधानमंडल 6 महीने के भीतर इसे दोबारा पारित कर देता है, तो यह फिर से राष्ट्रपति के पास जाता है। राज्यपाल के विपरीत, दोबारा पारित होने के बाद भी राष्ट्रपति पर हस्ताक्षर करने की कोई बाध्यता नहीं है।
Official Text
विचार के लिए आरीति विधेयक–जब कोई विधेयक राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के विचार के लिए आरीति रख लिया जाता है तब राष्ट्रपति घोषित करेगा कि वह विधेयक पर अनु मति देता है या अनु मति रोक लेता है : परंतु जहां विधेयक धन विधेयक नहीं है वहां राष्ट्रपति राज्यपाल को यह निदेश दे सकेगा कि वह विधेयक को, यथािस्थति, राज्य के विधान-मंडल के सदन या सदनि को ऐसे संदेश के साथ, जो अनु च्छेद 200 के पहले परंतु क मि वणिर्त है, लौटा दे और जब कोई विधेयक इस प्रकार लौटा दिया जाता है तब ऐसा संदेश मिलने कि तारीख से छह मास कि अवधि के भीतर सदन या सदनि द्वारा उस पर तदनु सार पु नविर्चार किया जाएगा और यदि वह सदन या सदनि द्वारा संशोधन सहित या उसके बिना फिर से पारित कर दिया जाता है तो उसे राष्ट्रपति के समि उसके विचार के लिए फिर से प्रस्तु त किया जाएगा । वििीय विषयि के संबंध मि प्रक्रिया
Simple Meaning
यह नियंत्रित करता है कि जब राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति (President) के लिए आरक्षित करते हैं तो क्या होता है। राष्ट्रपति के पास दो विकल्प होते हैं: (1) अनुमति देना—विधेयक कानून बन जाता है; (2) अनुमति रोकना—विधेयक समाप्त हो जाता है। गैर-धन विधेयकों के लिए, राष्ट्रपति राज्यपाल को विधेयक वापस भेजने का निर्देश दे सकते हैं। यदि विधानमंडल 6 महीने के भीतर इसे दोबारा पारित कर देता है, तो यह फिर से राष्ट्रपति के पास जाता है। राज्यपाल के विपरीत, दोबारा पारित होने के बाद भी राष्ट्रपति पर हस्ताक्षर करने की कोई बाध्यता नहीं है।
Explain Like Ten
कभी-कभी राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के पास यह कहकर भेजते हैं कि 'मैं इसका फैसला नहीं कर सकता, आप इसे संभालें।' अनुच्छेद 201 कहता है कि इसके बाद राष्ट्रपति अंतिम निर्णायक बन जाते हैं। वे इसे स्वीकार कर सकते हैं, अस्वीकार कर सकते हैं, या सुधार के लिए विधानसभा को वापस भेज सकते हैं। यदि विधानसभा 6 महीने के भीतर इसे दोबारा भेजती है, तो भी राष्ट्रपति इसे अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं।
Student Mode
यह आरक्षित विधेयकों के संबंध में राष्ट्रपति की शक्तियों को स्पष्ट करता है। अनुच्छेद 200 से मुख्य अंतर: (1) अंतिम निर्णय राष्ट्रपति करते हैं, राज्यपाल नहीं; (2) दोबारा पारित किए जाने के बाद भी राष्ट्रपति अनुमति देने के लिए बाध्य नहीं हैं; (3) पुनर्विचार के लिए 6 महीने की समय सीमा केवल गैर-धन विधेयकों पर लागू होती है; (4) राष्ट्रपति द्वारा धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेजने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है।
Example
राजस्थान का एक विधेयक राज्यपाल द्वारा आरक्षित किया जाता है क्योंकि यह केंद्रीय राजस्व मामलों को प्रभावित करता है। राष्ट्रपति राज्यपाल को इसे पुनर्विचार के लिए वापस करने का निर्देश देते हैं। राज्य विधानमंडल 6 महीने की अवधि के भीतर इसे दोबारा पारित करता है। विधेयक अब वापस राष्ट्रपति के पास जाता है, जिनके पास अभी भी सहमति देने या रोकने का अधिकार है।
Key Takeaway
अनुच्छेद 201 राष्ट्रपति को राज्यपाल द्वारा आरक्षित विधेयकों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार देता है—और राज्यपाल के विपरीत, राष्ट्रपति दोबारा पारित किए जाने पर भी अपनी सहमति रोक सकते हैं।
FAQs
क्या राष्ट्रपति अनुच्छेद 201 के तहत आरक्षित धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस कर सकते हैं?
नहीं। अनुच्छेद 201 का परंतुक स्पष्ट रूप से केवल 'गैर-धन विधेयकों' पर लागू होता है। राष्ट्रपति के लिए आरक्षित धन विधेयकों पर या तो सहमति दी जा सकती है या सहमति रोकी जा सकती है।
राष्ट्रपति द्वारा वापस किए गए विधेयक पर विचार करने के लिए राज्य विधानमंडल के पास कितनी समय सीमा होती है?
राष्ट्रपति का संदेश प्राप्त होने की तारीख से छह महीने। यदि विधानमंडल छह महीने के भीतर कोई कार्रवाई नहीं करता है, तो विधेयक समाप्त (Lapse) हो जाता है।
Quiz
अनुच्छेद 201 के तहत, जब राष्ट्रपति किसी गैर-धन विधेयक को वापस करते हैं और विधानमंडल उसे दोबारा पारित कर देता है, तो राष्ट्रपति क्या करते हैं?
Answer: वे विधेयक पर पुनर्विचार करते हैं और अनुमति दे या रोक सकते हैं
राष्ट्रपति के निर्देश पर वापस किए गए विधेयक पर पुनर्विचार करने के लिए अनुच्छेद 201 के तहत राज्य विधानमंडल को कितनी समय सीमा दी गई है?
Answer: 6 महीने