Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 200 Simplified: विधेयकों पर अनुमति

यह राज्य के विधेयक के कानून बनने से पहले का 'अंतिम द्वार' है। विधानसभा (या दोनों सदनों) द्वारा विधेयक पारित होने के बाद, यह राज्यपाल (Governor) के पास जाता है, जिनके पास चार विकल्प होते हैं: (1) अनुमति देना (Assent)—विधेयक कानून बन जाता है; (2) अनुमति रोकना (Withhold Assent)—विधेयक समाप्त हो जाता है; (3) पुनर्विचार के लिए लौटाना—गैर-धन विधेयकों को संदेश के साथ वापस भेजना (लेकिन यदि सदन इसे दोबारा पारित करता है, तो राज्यपाल को हस्ताक्षर करने होंगे); (4) राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करना—अनिवार्य है यदि विधेयक से उच्च न्यायालय (High Court) की स्थिति को खतरा हो।

Official Text

विधेयकि पर अनु मति–जब कोई विधेयक राज्य कि विधान सभा द्वारा या विधान परिषद् वाले राज्य मि विधान-मंडल के दोनि सदनि द्वारा पारित कर दिया गया है तब वह राज्यपाल के समि प्रस्तु त किया जाएगा और राज्यपाल घोषित करेगा कि वह विधेयक पर अनु मति देता है या अनु मति रोक लेता है अथवा वह विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरीति रखता है : परंतु राज्यपाल अनु मति के लिए अपने समि विधेयक प्रस्तु त किए जाने के पश्चात ् यथाशीघ्र उस विधेयक को, यदि वह धन विधेयक नहीं है तो, सदन या सदनि को इस संदेश के साथ लौटा सकेगा कि सदन या दोनि सदन विधेयक पर या उसके किन्हंि विनिदिर्ष्ट उपबंधि पर पु नविर्चार करि और विशिष्टतया किन्हंि ऐसे संशोधनि के पु रःस्थापन कि वांछनीयता पर विचार करि िजनकि उसने अपने संदेश मि सिफारिश कि है और जब विधेयक इस प्रकार लौटा दिया जाता है तब सदन या दोनि सदन विधेयक पर तदनु सार पु नविर्चार करि गे और यदि विधेयक सदन या सदनि द्वारा संशोधन सहित या उसके बिना फिर से पारित कर दिया जाता है और राज्यपाल के समि अनु मति के लिए प्रस्तु त किया जाता है तो राज्यपाल उस पर अनु मति नहीं रोके गा : परंतु यह और कि िजस विधेयक से, उसके विधि बन जाने पर, राज्यपाल कि राय मि उच्च न्यायालय कि शिक्तयि का ऐसा अल्पीकरण होगा कि वह स्थान, िजसकि पू तिर् के लिए वह न्यायालय इस संविधान द्वारा परिकिल्पत है, संकटापन्न हो जाएगा, उस विधेयक पर राज्यपाल अनु मति नहीं देगा, कि ं तु उसे राष्ट्रपति के विचार के लिए आरीति रखेगा ।

Simple Meaning

यह राज्य के विधेयक के कानून बनने से पहले का 'अंतिम द्वार' है। विधानसभा (या दोनों सदनों) द्वारा विधेयक पारित होने के बाद, यह राज्यपाल (Governor) के पास जाता है, जिनके पास चार विकल्प होते हैं: (1) अनुमति देना (Assent)—विधेयक कानून बन जाता है; (2) अनुमति रोकना (Withhold Assent)—विधेयक समाप्त हो जाता है; (3) पुनर्विचार के लिए लौटाना—गैर-धन विधेयकों को संदेश के साथ वापस भेजना (लेकिन यदि सदन इसे दोबारा पारित करता है, तो राज्यपाल को हस्ताक्षर करने होंगे); (4) राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करना—अनिवार्य है यदि विधेयक से उच्च न्यायालय (High Court) की स्थिति को खतरा हो।

Explain Like Ten

मान लीजिए कि कोई विधेयक एक होमवर्क की तरह है जिसे क्लास (विधानसभा) ने पूरा कर लिया है। इसे नियम बनने से पहले क्लास टीचर (राज्यपाल) के पास जाना होगा। टीचर कह सकते हैं: 'बहुत बढ़िया, स्वीकृत!', कह सकते हैं: 'नहीं, मैं इसे खारिज करता हूँ', इसे वापस भेज सकते हैं कि 'कृपया इस हिस्से को ठीक करें', या कह सकते हैं: 'मुझे इसे पहले प्रिंसिपल (राष्ट्रपति) को दिखाना होगा।' यदि क्लास टीचर द्वारा मांगी गई सुधारों को पूरा कर पुनः जमा करती है, तो टीचर को इसे स्वीकार करना ही होगा।

Student Mode

यह राज्य स्तर पर राष्ट्रपति की अनुमति से संबंधित अनुच्छेद 111 का समकक्ष है। मुख्य नियम: (1) राज्यपाल के पास चार विकल्प हैं: अनुमति देना, अनुमति रोकना, पुनर्विचार के लिए लौटाना (केवल गैर-धन विधेयक), या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना; (2) यदि लौटाया गया विधेयक दोबारा पारित होता है, तो राज्यपाल को अनुमति देनी ही होगी; (3) अनिवार्य आरक्षण: यदि राज्यपाल को लगता है कि विधेयक उच्च न्यायालय की संवैधानिक स्थिति को खतरे में डालता है, तो वे इसे राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करने के लिए बाध्य हैं।

Example

कर्नाटक का एक विधेयक जो उच्च न्यायालय के शुल्कों को नाटकीय रूप से कम करता है, विधानसभा द्वारा पारित किया जाता है। राज्यपाल, यह मानते हुए कि इससे उच्च न्यायालय की संवैधानिक स्थिति को खतरा है, इस पर सहमति नहीं दे सकते और उन्हें इसे राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना होगा। इसके बाद राष्ट्रपति इसके भाग्य का फैसला करते हैं—राज्यपाल नहीं।

Key Takeaway

अनुच्छेद 200 राज्यपाल को राज्य विधेयकों पर चार विकल्प देता है, लेकिन यदि विधानसभा लौटाए गए विधेयक को दोबारा पारित करती है, तो राज्यपाल को सहमति देनी ही होगी—कोई पॉकेट वीटो (Pocket Veto) नहीं है।

FAQs

क्या राज्यपाल किसी विधेयक को बिना कोई कार्रवाई किए अनिश्चित काल के लिए लंबित रख सकते हैं?

संविधान कहता है कि राज्यपाल को 'यथाशीघ्र' कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन कोई निश्चित समय सीमा नहीं है। यह विवादास्पद रहा है क्योंकि कुछ राज्यपालों ने वर्षों तक विधेयकों को रोके रखा है। न्यायालयों ने माना है कि अनिश्चितकालीन निष्क्रियता असंवैधानिक है।

क्या राज्यपाल धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं?

नहीं। पुनर्विचार के लिए लौटाने का विकल्प केवल गैर-धन विधेयकों के लिए उपलब्ध है। धन विधेयक (Money Bill) पर या तो अनुमति दी जानी चाहिए, या रोक ली जानी चाहिए, या उसे राष्ट्रपति के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए।

अनुच्छेद 200 में 'उच्च न्यायालय की स्थिति को संकट में डालना' का क्या अर्थ है?

यदि कोई राज्य विधेयक उच्च न्यायालय (High Court) के अधिकार क्षेत्र, शक्तियों या स्वतंत्रता को इस तरह कम करता है जो उसकी संवैधानिक भूमिका को कमजोर करता है, तो राज्यपाल को स्वतंत्र रूप से सहमति देने के बजाय इसे राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना होगा।

Quiz

अनुच्छेद 200 के तहत, यदि राज्यपाल किसी विधेयक को लौटाते हैं और विधानसभा उसे दोबारा पारित कर देती है, तो राज्यपाल को क्या करना होगा?

Answer: बिना किसी देरी के अनुमति देनी होगी

राज्यपाल को अनुच्छेद 200 के तहत किसी राज्य विधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना ही होगा जब वह विधेयक:

Answer: उच्च न्यायालय (High Court) की स्थिति को संकट में डालता हो

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