Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 192 Simplified: सदस्यों की अयोग्यताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय

यह अनुच्छेद विधायकों की अयोग्यता विवादों के निपटारे की प्रक्रिया निर्धारित करता है। यदि यह प्रश्न उठता है कि क्या कोई विधायक (MLA) अयोग्य हो गया है, तो निर्णय के लिए मामला राज्यपाल (Governor) को भेजा जाता है। राज्यपाल को पहले भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की राय प्राप्त करनी होगी और उसी राय के अनुसार कार्य करना होगा। राज्यपाल का निर्णय अंतिम होता है।

Official Text

[192 . सदस्यि कि निरहर्ताओं से संबंधित प्रश्नि पर विनिश्चय–(1) यदि यह प्रश्न उठता है कि किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का कोई सदस्य अनु च्छेद 191 के खंड (1) मि वणिर्त किसी निरहर्ता से ग्रस्त हो गया है या नहीं तो वह प्रश्न राज्यपाल को विनिश्चय के लिए निदिशित किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा । (2) ऐसे किसी प्रश्न पर विनिश्चय करने से पहले राज्यपाल निर्वाचन आयोग कि राय लेगा और ऐसी राय के अनु सार कायर् करेगा ।] ू चित नहीं कि गई) इस प्रकार पढ़े जाने के लिए प्रतिस्थापित किया गया : "(क) यदि वह भारत सरकार के या पहलि अनु सू ची मि विनिदिर्ष्ट किसी राज्य सरकार के अधीन कोई ऐसा लाभ का पद धारण करता है, िजसे संसद् ने विधि द्वारा उसके धारक को निरहिर्त घोषित किया है ।"। इस संशोधन का संविधान (चवालसिवां संशोधन) अधिनियम, 1978 कि धारा 45 द्वा रा (20-6-1979 से) लोप कर दिया गया । ु च्छेद के प्रयोजनि के लिए” के स्थान पर प्रतिस्थापित । ् संविधान (चवालसिवां संशोधन) अधिनियम, 1978 कि धारा 25 द्वारा (20- 6-1979 से) अनु च्छेद 192 प्रतिस्थापित ।

Simple Meaning

यह अनुच्छेद विधायकों की अयोग्यता विवादों के निपटारे की प्रक्रिया निर्धारित करता है। यदि यह प्रश्न उठता है कि क्या कोई विधायक (MLA) अयोग्य हो गया है, तो निर्णय के लिए मामला राज्यपाल (Governor) को भेजा जाता है। राज्यपाल को पहले भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की राय प्राप्त करनी होगी और उसी राय के अनुसार कार्य करना होगा। राज्यपाल का निर्णय अंतिम होता है।

Explain Like Ten

यदि इस बात पर विवाद होता है कि किसी विधायक को उसकी सीट से हटाया जाना चाहिए या नहीं, तो यह मामला किसी सामान्य अदालत में नहीं जाता। यह राज्य के राज्यपाल के पास जाता है। लेकिन राज्यपाल अपनी मर्जी से फैसला नहीं ले सकते—उन्हें पहले चुनाव आयोग से राय लेनी होती है और आयोग जो भी कहता है, उसका पालन करना होता है।

Student Mode

अनुच्छेद 192 सांसदों की अयोग्यता से संबंधित अनुच्छेद 103 का राज्य-स्तरीय प्रतिरूप है। मुख्य अंतर यह है कि यहाँ राज्यपाल निर्णयकर्ता हैं, लेकिन वे निर्वाचन आयोग (Election Commission) की राय के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य हैं। हालांकि निर्णय को 'अंतिम' घोषित किया गया है, लेकिन प्रक्रियागत त्रुटियों के मामलों में न्यायिक समीक्षा की अनुमति है।

Example

मान लीजिए कि तमिलनाडु में एक विधायक पर गुप्त रूप से सवैतनिक सरकारी नौकरी लेने का आरोप लगाया जाता है। विपक्ष शिकायत दर्ज करता है। अनुच्छेद 192 के तहत, मामला राज्यपाल के पास जाता है, जो इसे निर्वाचन आयोग को राय के लिए भेजते हैं। आयोग की राय प्राप्त करने के बाद, राज्यपाल विधायक की अयोग्यता पर अंतिम निर्णय जारी करते हैं।

Key Takeaway

अनुच्छेद 192 अयोग्यता के निर्णयों को राज्यपाल के पास रखता है, लेकिन निर्वाचन आयोग (Election Commission) की राय एक अनिवार्य और बाध्यकारी संवैधानिक नियंत्रण के रूप में कार्य करती है।

FAQs

क्या उच्च न्यायालय अनुच्छेद 192 के तहत राज्यपाल के निर्णय की समीक्षा कर सकता है?

आमतौर पर, प्रक्रियागत उल्लंघनों (जैसे चुनाव आयोग से परामर्श न करना) के मामलों में न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।

क्या राज्यपाल निर्वाचन आयोग की राय मानने के लिए बाध्य हैं?

हाँ। अनुच्छेद 192(2) स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्यपाल 'ऐसी राय के अनुसार कार्य करेंगे', जिससे यह राय केवल सलाहकारी नहीं बल्कि बाध्यकारी हो जाती है।

Quiz

अनुच्छेद 192 के तहत, किसी विधायक की अयोग्यता पर निर्णय लेने से पहले राज्यपाल को किसकी राय प्राप्त करनी चाहिए?

Answer: निर्वाचन आयोग (Election Commission)

अनुच्छेद 192 के तहत विधायकों की अयोग्यता के प्रश्नों पर अंतिम निर्णय कौन सी संस्था जारी करती है?

Answer: राज्यपाल (Governor)

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