Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 190 Simplified: स्थानों का रिक्त होना

अनुच्छेद 190 राज्य विधानमंडलों में स्थानों के रिक्त होने को नियंत्रित करता है। इसके चार मुख्य नियम हैं: 1) कोई भी व्यक्ति एक ही राज्य के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) का सदस्य नहीं हो सकता। 2) कोई भी व्यक्ति एक साथ दो या दो से अधिक राज्यों के विधानमंडलों का सदस्य नहीं हो सकता। 3) कोई सदस्य अयोग्य घोषित होने पर या स्वेच्छा से इस्तीफा (Resignation) देने पर (यदि अध्यक्ष/सभापति संतुष्ट हों कि इस्तीफा स्वैच्छिक और वास्तविक है) अपना स्थान खाली कर देगा। 4) यदि कोई सदस्य 60 दिनों तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहता है, तो सदन उसका स्थान रिक्त घोषित कर सकता है।

Official Text

स्थानि का रिक्त होना–(1) कोई व्यिक्त राज्य के विधान-मंडल के दोनि सदनि का सदस्य नहीं होगा और जो व्यिक्त दोनि सदनि का सदस्य चु न लिया जाता है उसके एक या दू सरे सदन के स्थान को रिक्त करने के लिए उस राज्य का विधान-मंडल विधि द्वारा उपबंध करेगा । ू चित नहीं कि गई) । इस संशोधन का संविधान (चवालसिवां संशोधन) अधिनियम, 1978 कि धारा 45 द्वारा (20-6-1979 से) लोप कर दिया गया । (2) कोई व्यिक्त पहलि अनु सू ची मि विनिदिर्ष्ट दो या अधिक राज्यि के विधान- मंडलि का सदस्य नहीं होगा और यदि कोई व्यिक्त दो या अधिक ऐसे राज्यि के विधान- मंडलि का सदस्य चु न लिया जाता है तो ऐसी अवधि कि समािप्त के पश्चात ् जो राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियमि मि विनिदिर्ष्ट कि जाए, ऐसे सभी राज्यि के विधान- मंडलि मि ऐसे व्यिक्त का स्थान रिक्त हो जाएगा यदि उसने एक राज्य को छोड़कर अन्य राज्यि के विधान-मंडलि मि अपने स्थान को पहले हि नहीं त्याग दिया है । (3) यदि राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य– (क) [अनु च्छेद 191 के खंड (2)] मि वणिर्त किसी निरहर्ता से ग्रस्त हो जाता है, या [(ख) यथािस्थति, अध्यि या सभापति को संबोधित अपने हस्तारि सहित लेख द्वारा अपने स्थान का त्याग कर देता है और उसका त्यागपत्र, यथािस्थति, अध्यि या सभापति द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है,] तो ऐसा होने पर उसका स्थान रिक्त हो जाएगा : [परंतु उपखंड (ख) मि निदिर्ष्ट त्यागपत्र कि दशा मि , यदि प्राप्त जानकारि से या अन्यथा और ऐसी जांच करने के पश्चात ् , जो वह ठकि समझे, यथािस्थति, अध्यि या सभापति का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा त्यागपत्र स्वैिच्छक या असलि नहीं है तो वह ऐसे त्यागपत्र को स्वीकार नहीं करेगा ।] (4) यदि किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य साठ दिन कि अवधि तक सदन कि अनु िा के बिना उसके सभी अधिवेशनि से अनु पिस्थत रहता है तो सदन उसके स्थान को रिक्त घोषित कर सकेगा : परंतु साठ दिन कि उक्त अवधि कि संगणना करने मि किसी ऐसी अवधि को हिसाब मि नहीं लिया जाएगा िजसके दौरान सदन सत्रावसित या निरंतर चार से अधिक दिनि के लिए स्थगित रहता है ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 190 राज्य विधानमंडलों में स्थानों के रिक्त होने को नियंत्रित करता है। इसके चार मुख्य नियम हैं: 1) कोई भी व्यक्ति एक ही राज्य के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) का सदस्य नहीं हो सकता। 2) कोई भी व्यक्ति एक साथ दो या दो से अधिक राज्यों के विधानमंडलों का सदस्य नहीं हो सकता। 3) कोई सदस्य अयोग्य घोषित होने पर या स्वेच्छा से इस्तीफा (Resignation) देने पर (यदि अध्यक्ष/सभापति संतुष्ट हों कि इस्तीफा स्वैच्छिक और वास्तविक है) अपना स्थान खाली कर देगा। 4) यदि कोई सदस्य 60 दिनों तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहता है, तो सदन उसका स्थान रिक्त घोषित कर सकता है।

Explain Like Ten

यदि आप दो अलग-अलग कुर्सियों पर एक साथ बैठने की कोशिश करेंगे, तो खेल के नियम आपको ऐसा करने से रोकेंगे। अनुच्छेद 190 विधायकों से यही कहता है: आप एक समय में केवल एक सीट रख सकते हैं। और यदि आप बिना बताए लगातार 60 दिनों तक नहीं आते हैं, तो आप अपनी सीट खो देंगे!

Student Mode

अनुच्छेद 190 चार स्थितियों में सीटों के रिक्त होने का प्रावधान करता है: (1) एक ही राज्य के दोनों सदनों में दोहरी सदस्यता, (2) दो या अधिक राज्यों के विधानमंडलों में दोहरी सदस्यता, (3) अनुच्छेद 191 के तहत अयोग्यता या अध्यक्ष/सभापति द्वारा स्वीकार किया गया स्वैच्छिक और वास्तविक इस्तीफा, और (4) बिना अनुमति के लगातार 60 दिनों की अनुपस्थिति (जिसमें सत्र के सत्रावसान या लगातार 4 से अधिक दिनों के स्थगन को नहीं गिना जाता)।

Example

मान लीजिए कि महाराष्ट्र में कोई विधायक (MLA) विधान परिषद (Legislative Council) के लिए भी चुना जाता है। अनुच्छेद 190 के तहत, वे दोनों सीटें नहीं रख सकते—उन्हें नियमों के अनुसार एक सीट छोड़नी होगी। इसी तरह, यदि कोई विधायक बिना अनुमति के 60 दिनों तक विधानसभा सत्र में आना बंद कर देता है, तो विधानसभा उसकी सीट को रिक्त घोषित कर सकती है।

Key Takeaway

अनुच्छेद 190 यह सुनिश्चित करता है कि राज्य विधानमंडल में किसी सीट का सक्रिय रूप से उपयोग किया जाए—कोई दोहरी सदस्यता या छद्म सदस्यता नहीं हो सकती।

FAQs

क्या कोई व्यक्ति एक ही समय में महाराष्ट्र की विधानसभा और विधान परिषद दोनों का सदस्य हो सकता है?

नहीं। अनुच्छेद 190(1) एक ही राज्य के दोनों सदनों की दोहरी सदस्यता पर प्रतिबंध लगाता है। राज्य विधानमंडल को यह प्रावधान करना होगा कि वह व्यक्ति किसी एक सदन की सीट खाली करे।

यदि कोई सदस्य बिना अनुमति के 60 दिनों तक अनुपस्थित रहता है तो क्या होता है?

सदन उस सीट को रिक्त घोषित कर सकता है। हालांकि, उन दिनों को इन 60 दिनों में नहीं गिना जाता है जब सदन का सत्रावसान (Prorogue) हो या लगातार 4 से अधिक दिनों के लिए स्थगित (Adjourn) हो।

Quiz

यदि कोई विधायक विधानसभा से इस्तीफा देता है, तो इसे स्वीकार करने से पहले किसे यह सत्यापित करना होगा कि इस्तीफा स्वैच्छिक और वास्तविक है?

Answer: सदन के अध्यक्ष या सभापति (Speaker or Chairman)

अनुच्छेद 190 के तहत बिना अनुमति के लगातार कितने दिनों की अनुपस्थिति के कारण सीट को रिक्त घोषित किया जा सकता है?

Answer: 60 दिन

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