Part VI - The States • अनुच्छेद
अनुच्छेद 186 Simplified: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते
यह अनिवार्य करता है कि विधानसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति, उपसभापति के वेतन और भत्ते राज्य विधानमंडल द्वारा कानून बनाकर निर्धारित किए जाते हैं, और राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund) से भुगतान किए जाते हैं।
Official Text
अध्यि और उपाध्यि तथा सभापति और उपसभापति के वेतन और भिे– विधान सभा के अध्यि और उपाध्यि को तथा विधान परिषद् के सभापति और उपसभापति को, ऐसे वेतन और भिि का जो राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, नियत करे और जब तक इस निमिि इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसे वेतन और भिि का जो दू सरि अनु सू ची मि विनिदिर्ष्ट हि , संदाय किया जाएगा ।
Simple Meaning
यह अनिवार्य करता है कि विधानसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति, उपसभापति के वेतन और भत्ते राज्य विधानमंडल द्वारा कानून बनाकर निर्धारित किए जाते हैं, और राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund) से भुगतान किए जाते हैं।
Explain Like Ten
राज्य को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापति और उपसभापति को उनके वेतन का भुगतान करना होगा। यह राशि राज्य के कानून द्वारा तय की जाती है, सरकार की कार्यपालिका (कार्यकारी अधिकारियों) द्वारा नहीं।
Student Mode
यह प्रावधान करता है कि विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधान परिषद सभापति, उपसभापति के वेतन और भत्ते राज्य विधानमंडल द्वारा कानून बनाकर निर्धारित किए जाते हैं और सीधे राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित होते हैं।
Example
राज्य विधानमंडल अध्यक्ष और सभापति के मासिक पारिश्रमिक और गृह किराया भत्ते को तय करने के लिए वेतन और भत्ता अधिनियम पारित करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनका वित्तीय मुआवजा सुरक्षित रहे और कार्यपालिका के हस्तक्षेप से स्वतंत्र रहे।
Key Takeaway
पीठासीन अधिकारियों के वेतन राज्य के कानून द्वारा तय किए जाते हैं और उनकी स्वतंत्रता की गारंटी देने के लिए राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं।
FAQs
अध्यक्ष और सभापति के वेतन कौन निर्धारित करता है?
राज्य का विधानमंडल कानून बनाकर उनके वेतन और भत्ते निर्धारित करता है।
यदि राज्य विधानमंडल ने वेतन निर्धारित नहीं किया है तो बैकअप प्रावधान क्या है?
उन्हें संविधान की दूसरी अनुसूची (Second Schedule) में निर्दिष्ट वेतन और भत्तों का भुगतान किया जाता है।
इन वेतनों को राज्य की संचित निधि पर भारित क्यों किया जाता है?
संचित निधि पर वेतन भारित करने का अर्थ है कि उन्हें विधानमंडल में वार्षिक मतदान की आवश्यकता नहीं होती है, जो पीठासीन अधिकारियों को कार्यपालिका के दबाव से बचाता है।
Quiz
राज्य विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन निर्धारित करने की शक्ति किसके पास है?
Answer: कानून द्वारा राज्य विधानमंडल के पास
यदि राज्य विधानमंडल ने अभी तक वेतन निर्धारित करने वाला कानून नहीं बनाया है, तो संविधान की कौन सी अनुसूची उन्हें निर्धारित करती है?
Answer: दूसरी अनुसूची
राज्य विधायी पीठासीन अधिकारियों के वेतन किस पर भारित होते हैं:
Answer: राज्य की संचित निधि पर