Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 185 Simplified: जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है, तब उसका पीठासीन न होना

विधान परिषद के सभापति या उपसभापति को परिषद की अध्यक्षता करने से रोकता है जब उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो। वे कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं, और प्रथमतः मतदान कर सकते हैं, लेकिन वे मत बराबर होने पर निर्णायक मत (Casting Vote) का उपयोग नहीं कर सकते हैं।

Official Text

जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना–(1) विधान परिषद् कि किसी बैठक मि , जब सभापति को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब सभापति, या जब उपसभापति को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उपसभापति, उपिस्थत रहने पर भी पीठासीन नहीं होगा और अनु च्छेद 184 के खंड (2) के उपबंध ऐसी प्रत्येक बैठक के संबंध मि वैसे हि लागू हगिे जैसे वे उस बैठक के संबंध मि लागू होते हि िजससे, यथािस्थति, सभापति या उपसभापति अनु पिस्थत है । (2) जब सभापति को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विधान परिषद् मि विचाराधीन है तब उसको विधान परिषद् मि बोलने और उसकि कायर्वाहियि मि अन्यथा

Simple Meaning

विधान परिषद के सभापति या उपसभापति को परिषद की अध्यक्षता करने से रोकता है जब उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो। वे कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं, और प्रथमतः मतदान कर सकते हैं, लेकिन वे मत बराबर होने पर निर्णायक मत (Casting Vote) का उपयोग नहीं कर सकते हैं।

Explain Like Ten

यदि परिषद सभापति को नौकरी से हटाने के लिए मतदान कर रही है, तो सभापति बैठक का संचालन नहीं कर सकते हैं। वे भाग ले सकते हैं और एक बार मतदान कर सकते हैं, लेकिन वे मत बराबर होने पर उसे तोड़ नहीं सकते (निर्णायक वोट नहीं दे सकते)।

Student Mode

यह अनिवार्य करता है कि विधान परिषद के सभापति या उपसभापति अपने विरुद्ध हटाने के प्रस्ताव के विचाराधीन रहने के दौरान परिषद की अध्यक्षता नहीं कर सकते। यह उन्हें प्रथमतः मतदान करने तक सीमित करता है और उनके निर्णायक मत के अधिकार को समाप्त करता है।

Example

सभापति को हटाने के प्रस्ताव पर परिषद की बहस के दौरान, सभापति अध्यक्षता नहीं कर सकते हैं और उन्हें पीठासीन अधिकारी की सीट से हटना होगा। सभापति बहस में भाग ले सकते हैं और मतदान कर सकते हैं, लेकिन यदि हटाने के पक्ष और विरोध में मत बराबर होते हैं, तो उनके पास निर्णायक मत का अधिकार नहीं होता है।

Key Takeaway

विधान परिषद के पीठासीन अधिकारी अपने स्वयं को हटाए जाने के प्रस्ताव पर विचार के दौरान सत्रों की अध्यक्षता नहीं कर सकते हैं, जिससे निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।

FAQs

क्या सभापति अपने हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान परिषद की अध्यक्षता कर सकते हैं?

नहीं। उपस्थित रहने पर भी सभापति को हटाने के प्रस्ताव की बहस के दौरान अध्यक्षता करने से संवैधानिक रूप से प्रतिबंधित किया गया है।

हटाने की कार्यवाही के दौरान सभापति के मतदान अधिकार क्या हैं?

सभापति केवल प्रथमतः (एक सामान्य सदस्य की तरह) मतदान कर सकते हैं लेकिन मत बराबर होने की स्थिति में उनके पास कोई निर्णायक मत (Casting Vote) नहीं होता है।

क्या सभापति हटाने की कार्यवाही के दौरान परिषद में बोल सकते हैं?

हाँ, उनके पास हटाने के प्रस्ताव के विचाराधीन रहने के दौरान बोलने और कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार है।

Quiz

जब विधान परिषद में सभापति को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तो सभापति:

Answer: अध्यक्षता नहीं कर सकते लेकिन प्रथमतः बोलने और मतदान करने का अधिकार है

अनुच्छेद 185 के तहत, हटाने की कार्यवाही के दौरान सभापति किस मामले में मतदान करने के हकदार नहीं हैं?

Answer: मत बराबर होने की स्थिति में निर्णायक मत देना

जब सभापति को हटाने का प्रस्ताव सक्रिय हो, तो परिषद की अध्यक्षता कौन करता है?

Answer: उपसभापति

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