Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 177 Simplified: सदनों के संबंध में मंत्रियों और महाधिवक्ता के अधिकार

प्रत्येक राज्य मंत्री और महाधिवक्ता (Advocate-General) को राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन, या उसकी किसी भी समिति जिसमें उन्हें सदस्य नामित किया गया है, की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार देता है, लेकिन जब तक वे उस सदन के निर्वाचित सदस्य नहीं होते, उन्हें मतदान करने का अधिकार नहीं देता है।

Official Text

सदनि के बारे मि मंति्रयि और महाधिवक्ता के अधिकार–प्रत्येक मंत्री और राज्य के महाधिवक्ता को यह अधिकार होगा कि वह उस राज्य कि विधान सभा मि या विधान परिषद् वाले राज्य कि दशा मि दोनि सदनि मि बोले और उनकि कायर्वाहियि मि अन्यथा भाग ले और वि धान-मंडल कि किसी समिति मि , िजसमि उसका नाम सदस्य के रूप मि दिया गया है, बोले और उसकि कायर्वाहियि मि अन्यथा भाग ले, किन्तु इस अनु च्छेद के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा । ु च्छेद 174” के स्थान पर प्रतिस्थापित । प्रतिस्थापित । इस चचार् को अग्रता देने के लिए” शब्दि का लोप किया गया । राज्य के विधान-मंडल के अधिकारि

Simple Meaning

प्रत्येक राज्य मंत्री और महाधिवक्ता (Advocate-General) को राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन, या उसकी किसी भी समिति जिसमें उन्हें सदस्य नामित किया गया है, की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार देता है, लेकिन जब तक वे उस सदन के निर्वाचित सदस्य नहीं होते, उन्हें मतदान करने का अधिकार नहीं देता है।

Explain Like Ten

यह कहता है कि राज्य के मंत्री और महाधिवक्ता (राज्य के मुख्य वकील) दोनों में से किसी भी सदन में बोल सकते हैं और बैठकों में भाग ले सकते हैं, लेकिन वे केवल तभी मतदान कर सकते हैं जब वे उस सदन के निर्वाचित सदस्य हों।

Student Mode

यह सुनिश्चित करता है कि राज्य के मंत्रियों और महाधिवक्ता के पास किसी भी सदन तथा विधानमंडल की किसी भी समिति, जिसके वे सदस्य नामित किए गए हैं, की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार है, लेकिन यह उन्हें मतदान करने से तब तक स्पष्ट रूप से रोकता है जब तक कि वे उस सदन के सदस्य न हों।

Example

महाधिवक्ता (Advocate-General), जो एक निर्वाचित विधायक (MLA) नहीं हैं, किसी नए विधेयक के कानूनी पहलुओं को समझाने और सवालों के जवाब देने के लिए विधानसभा सत्र में भाग ले सकते हैं, लेकिन विधेयक के पारित होने पर मतदान नहीं कर सकते। इसी तरह, एक मंत्री जो विधान परिषद के सदस्य हैं, वे विधानसभा में बोल सकते हैं लेकिन केवल विधान परिषद में ही मतदान कर सकते हैं।

Key Takeaway

मंत्री और महाधिवक्ता विधायी कार्यवाहियों में भाग ले सकते हैं और उन्हें संबोधित कर सकते हैं, लेकिन वे केवल तभी मतदान कर सकते हैं जब वे उस विशिष्ट सदन के सदस्य हों।

FAQs

क्या कोई मंत्री उस सदन में बोल सकता है जिसके वे सदस्य नहीं हैं?

हाँ, एक मंत्री जो विधानसभा के सदस्य हैं, वे विधान परिषद में बोल सकते हैं और भाग ले सकते हैं (और इसके विपरीत भी), लेकिन वे उस सदन में मतदान नहीं कर सकते जिसके वे सदस्य नहीं हैं।

अनुच्छेद 177 के तहत महाधिवक्ता के क्या अधिकार हैं?

महाधिवक्ता विधानसभा, विधान परिषद और किसी भी विधायी समिति जिसमें उन्हें नामित किया गया है, की कार्यवाही में बोल सकते हैं और भाग ले सकते हैं, लेकिन वे किसी भी परिस्थिति में मतदान नहीं कर सकते क्योंकि वे एक निर्वाचित विधायक (Legislator) नहीं हैं।

क्या गैर-विधायक मंत्री कार्यवाहियों में भाग ले सकते हैं?

हाँ, ऐसा व्यक्ति जो मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है लेकिन किसी भी सदन का सदस्य नहीं है (अनुच्छेद 164 के तहत अधिकतम 6 महीने तक अनुमति है) के पास दोनों सदनों में बोलने और भाग लेने का अधिकार है, हालांकि वे मतदान नहीं कर सकते।

अनुच्छेद 177 शासन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह सुनिश्चित करता है कि कार्यपालिका (मंत्री) और राज्य के कानूनी सलाहकार विधानमंडल के दोनों सदनों में सरकारी नीति की व्याख्या कर सकें और विधेयकों का बचाव कर सकें, जिससे सुचारू विधायी कामकाज में सुविधा होती है।

Quiz

निम्नलिखित में से किसे राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में बोलने का अधिकार है लेकिन मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है?

Answer: राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General)

यदि कोई मंत्री विधानसभा के निर्वाचित सदस्य हैं, तो क्या वे विधान परिषद में मतदान कर सकते हैं?

Answer: नहीं, वे केवल विधानसभा में ही मतदान कर सकते हैं

अनुच्छेद 177 के तहत मंत्री और महाधिवक्ता कहाँ बोल सकते हैं?

Answer: किसी भी सदन और विधानमंडल की किसी भी समिति में जिसमें उन्हें नामित किया गया है

मंत्रिमंडल में नियुक्त गैर-विधायक मंत्री की मतदान पात्रता क्या है?

Answer: वे किसी भी सदन में मतदान नहीं कर सकते

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