Part VI - The States • अनुच्छेद
अनुच्छेद 171 Simplified: विधान परिषदों की संरचना
राज्य विधान परिषदों (Vidhan Parishads) की संरचना और आकार को नियंत्रित करता है। विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती, और 40 से कम नहीं हो सकती। सदस्यों को स्थानीय निकायों, स्नातकों, शिक्षकों, विधायकों (MLAs) और राज्यपाल द्वारा नामांकित सदस्यों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है।
Official Text
विधान परिषदि कि संरचना–(1) विधान परिषद् वाले राज्य कि विधान परिषद् के सदस्यि कि कु ल संख्या उस राज्य कि विधान सभा के सदस्यि कि कु ल संख्या के [एक-तिहाई] से अधिक नहीं होगी : प्रतिस्थापित । प्रतिस्थापित । संविधान (चौरासीवां संशोधन) अधिनियम, 2001 कि धारा 5 द्वारा (21 -2-2002 से) मू ल अंक "1971 के स्थान पर "1991"" अंक प्रतिस्थापित किए गए थे । ु छ शब्दि के स्थान पर प्रतिस्थापित । प्रतिस्थापित । परंतु किसी राज्य कि विधान परिषद् के सदस्यि कि कु ल संख्या किसी भी दशा मि चालसि से कम नहीं होगी । (2) जब तक संसद् विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक किसी राज्य कि विधान परिषद् कि संरचना खंड (3) मि उपबंधित रीति से होगी । (3) किसी राज्य कि विधान परिषद् के सदस्यि कि कु ल संख्या का– (क) यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई भाग उस राज्य कि नगरपालिकाओं, िजला बोडि और अन्य ऐसे स्थानीय प्राधिकारियि के, जो संसद् विधि द्वारा विनिदिर्ष्ट करे, सदस्यि से मिलकर बनने वाले निवार्चक-मंडलि द्वारा निर्वाचित होगा ; (ख) यथाशक्य निकट तम बारहवां भाग उस राज्य मि निवास करने वाले ऐसे व्यिक्तयि से मिलकर बनने वाले निवार्चक-मंडलि द्वारा निर्वाचित होगा, जो भारत के राज्यिेत्र मि किसी विश्वविद्यालय के कम से कम तीन वषर् से स्नातक हि या िजनके पास कम से कम तीन वषर् से ऐसी अहर्ताएं हि जो संस द् द्वारा बनाई गई किसी विधि या उसके अधीन ऐसे किसी विश्वविद्यालय के स्नातक कि अहर्ताओं के समतु ल्य विहित कि गई हि ; (ग) यथाशक्य निकटतम बारहवां भाग ऐसे व्यिक्तयि से मिलकर बनने वाले निवार्चक-मंडलि द्वारा निर्वाचित होगा जो राज्य के भीतर माध्यमिक पाठशालाओं से अनिम्न स्तर कि ऐसी शििा संस्थाओं मि , जो संसद् द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन विहित कि जाएं, पढ़ाने के काम मि कम से कम तीन वषर् से लगे हु ए हि ; (घ) यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई भाग राज्य कि विधान सभा के सदस्यि द्वारा ऐसे व्यिक्तयि मि से नि वार्चित होगा जो विधान सभा के सदस्य नहीं हि ; (ङ) शेष सदस्य राज्यपाल द्वारा खंड (5) के उपबंधि के अनु सार नामनिदिशित किए जाएंगे । (4) खंड (3) के उपखंड (क), उपखंड (ख) और उपखंड (ग) के अधीन निर्वाचित होने वाले सदस्य ऐसे प्रादेशिक निर्वाचन-िेत्रि मि चु ने जाएंगे, जो संसद् द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन विहित किए जाएं तथा उक्त उपखंडि के और उक्त खंड के उपखंड (घ) के अधीन निर्वाचन आनु पातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनु सार एकल संक्रमणीय मत द्वारा हगिे । (5) राज्यपाल द्वारा खंड (3) के उपखंड (ङ) के अधीन नामनिदिशित किए जाने वाले सदस्य ऐसे व्यिक्त हगिे िजन्हि निम्नलिखित विषयि के संबंध मि विशेषिान या व्यावहारिक अनु भव है, अथार्त ् :– साहित्य, वििान, कला, सहकारि आंदोलन और समाज सेवा ।
Simple Meaning
राज्य विधान परिषदों (Vidhan Parishads) की संरचना और आकार को नियंत्रित करता है। विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती, और 40 से कम नहीं हो सकती। सदस्यों को स्थानीय निकायों, स्नातकों, शिक्षकों, विधायकों (MLAs) और राज्यपाल द्वारा नामांकित सदस्यों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है।
Explain Like Ten
यह बताता है कि राज्य के दूसरे कानून बनाने वाले सदन (विधान परिषद) का गठन कैसे किया जाता है। यह स्पष्ट करता है कि यह मुख्य विधानसभा के एक-तिहाई से बड़ा नहीं हो सकता और इसके सदस्य स्थानीय निकायों, स्नातकों, शिक्षकों और राज्यपाल द्वारा चुने जाते हैं।
Student Mode
यह विधान परिषदों की संरचना और सदस्य संख्या (न्यूनतम 40, विधानसभा का अधिकतम 1/3) निर्धारित करता है और इसके सदस्यों के चयन के लिए एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) का उपयोग करके आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
Example
यदि महाराष्ट्र की विधानसभा में 288 सदस्य हैं, तो उसकी विधान परिषद में 96 से अधिक सदस्य नहीं हो सकते (288 का 1/3)। व्यवहार में, इसकी विधान परिषद में 78 सीटें हैं, जो स्थानीय प्रतिनिधियों, स्नातकों, शिक्षकों और राज्यपाल के नामांकित व्यक्तियों द्वारा भरी जाती हैं।
Key Takeaway
विधान परिषद की सदस्य संख्या विधानसभा की सदस्य संख्या के एक-तिहाई (न्यूनतम 40) तक सीमित है और यह स्थानीय समूहों, स्नातकों और पेशेवरों का प्रतिनिधित्व करने वाले अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए और नामांकित सदस्यों से बनती है।
FAQs
विधान परिषद की अधिकतम और न्यूनतम सदस्य संख्या क्या है?
अधिकतम संख्या राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या का एक-तिहाई है, और न्यूनतम संख्या 40 सदस्य है।
विधान परिषद का निर्वाचक मंडल कैसे संरचित होता है?
मोटे तौर पर: 1/3 भाग स्थानीय निकायों (नगर पालिकाओं, जिला बोर्डों) द्वारा, 1/12 भाग कम से कम 3 वर्ष पुराने स्नातकों द्वारा, 1/12 भाग कम से कम 3 वर्ष से माध्यमिक स्कूलों से निम्न स्तर के शिक्षण संस्थानों में शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों द्वारा, 1/3 भाग राज्य की विधानसभा के सदस्यों (MLAs) द्वारा निर्वाचित होते हैं, और शेष 1/6 भाग राज्यपाल द्वारा नामांकित किए जाते हैं।
विधान परिषद में राज्यपाल द्वारा नामांकित सदस्यों के पास क्या योग्यताएं होनी चाहिए?
उनके पास साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन (Co-operative Movement) या समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए।
विधान परिषदों के लिए किस निर्वाचन पद्धति का उपयोग किया जाता है?
निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote - STV) के माध्यम से किए जाते हैं।
Quiz
राज्य विधान परिषद की अधिकतम स्वीकार्य सदस्य संख्या क्या है?
Answer: विधानसभा का एक-तिहाई
विधान परिषद के सदस्यों का कितना भाग राज्यपाल द्वारा नामांकित किया जाता है?
Answer: 1/6
राज्यसभा में राष्ट्रपति के नामांकन की तुलना में अनुच्छेद 171 के तहत राज्यपाल के नामांकन के लिए निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्र अद्वितीय है?
Answer: सहकारी आंदोलन (Co-operative Movement)
विधान परिषद के सदस्यों की न्यूनतम संख्या क्या हो सकती है?
Answer: 40