Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 166 Simplified: राज्य की सरकार के कार्य का संचालन

राज्य सरकार के सभी कार्यकारी निर्णय और आदेश आधिकारिक रूप से राज्यपाल के नाम पर लिए जाते हैं। यह अनुच्छेद राज्यपाल को यह नियम बनाने की भी शक्ति देता है कि सरकारी निर्णयों पर हस्ताक्षर (प्रमाणीकरण) कैसे किए जाएंगे और मंत्रियों के बीच विभागों (पोर्टफोलियो) का आवंटन कैसे किया जाएगा।

Official Text

राज्य कि सरकार के कायर् का संचालन–(1) किसी राज्य कि सरकार कि समस्त कार्यपालिका कारर्वाई राज्यपाल के नाम से कि हु ई कहि जाएगी । (2) राज्यपाल के नाम से किए गए और निष्पा दित आदेशि और अन्य लिखति को ऐसी रीति से अधिप्रमाणित किया जाएगा जो राज्यपाल द्वारा बनाए जाने वाले नियमि मि विनिदिर्ष्ट कि जाए और इस प्रकार अधिप्रमाणित आदेश या लिखत कि विधिमान्यता इस आधार पर प्रश्नगत नहीं कि जाएगी कि वह राज्यपाल द्वारा किया गया या निष्पा दित आदेश या लिखत नहीं है । (3) राज्यपाल, राज्य कि सरकार का कायर् अधिक सु विधापू वर्क किए जाने के लिए और जहां तक वह कायर् ऐसा कायर् नहीं है िजसके विषय मि इस संविधान द्वारा या इसके अधीन राज्यपाल से यह अपेिति है कि वह अपने विवेकानु सार कायर् करे वहां तक मंति्र यि मि उक्त कायर् के आबंटन के लिए नियम बनाएगा । (4)* * * * (चवालसिवां संशोधन) अधिनियम, 1978 कि धारा 23 द्वारा ( 20- 6-1979 से) अन्तःस्थापित ।

Simple Meaning

राज्य सरकार के सभी कार्यकारी निर्णय और आदेश आधिकारिक रूप से राज्यपाल के नाम पर लिए जाते हैं। यह अनुच्छेद राज्यपाल को यह नियम बनाने की भी शक्ति देता है कि सरकारी निर्णयों पर हस्ताक्षर (प्रमाणीकरण) कैसे किए जाएंगे और मंत्रियों के बीच विभागों (पोर्टफोलियो) का आवंटन कैसे किया जाएगा।

Explain Like Ten

यह नियम कहता है कि राज्य सरकार के सभी आधिकारिक आदेश राज्यपाल के नाम से जारी किए जाएंगे, और राज्यपाल मंत्रियों के बीच विभागों को बांटने के नियम तय करते हैं।

Student Mode

यह राज्य स्तर पर कार्यकारी निर्णयों के निष्पादन को नियंत्रित करता है (जो संघ स्तर पर अनुच्छेद 77 के समान है)। यह अनिवार्य करता है: (1) राज्य सरकार की सभी कार्यपालिका कार्रवाइयाँ राज्यपाल के नाम पर ली गई कही जाएंगी। (2) राज्यपाल के नाम पर जारी आदेशों को कार्य-संचालन नियमों (Rules of Business) के तहत प्रमाणित किया जाना आवश्यक है; एक बार प्रमाणित होने के बाद उनकी वैधता को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि वे राज्यपाल द्वारा जारी नहीं किए गए थे। (3) राज्यपाल मंत्रियों के बीच सरकारी कार्यों के सुगम संचालन और विभागों के आवंटन के नियम बनाता है।

Example

जब राज्य सरकार किसी नए अधिकारी की नियुक्ति या बजट आवंटन की अधिसूचना जारी करती है, तो वह दस्तावेज़ 'राज्यपाल के आदेश से और उनके नाम पर' शुरू होता है और उस पर संबंधित विभाग के सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।

Key Takeaway

राज्य सरकार के सभी प्रशासनिक कार्य राज्यपाल के नाम पर ही किए जाते हैं और उन्हें अधिकृत अधिकारियों द्वारा प्रमाणित किया जाना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

FAQs

कार्यकारी आदेश राज्यपाल के नाम पर क्यों जारी किए जाने चाहिए?

क्योंकि राज्यपाल राज्य का औपचारिक कार्यपालिका प्रमुख होता है। अनुच्छेद 154 के तहत, राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है, और अनुच्छेद 166(1) सभी निर्णयों को राज्यपाल के नाम पर व्यक्त करने की प्रक्रियात्मक आवश्यकता निर्धारित करता है।

अनुच्छेद 166(1) का अनुपालन न करने का क्या परिणाम होता है?

यदि कोई कार्यकारी आदेश राज्यपाल के नाम पर जारी नहीं किया जाता है, तो वह स्वतः अमान्य नहीं हो जाता, लेकिन सरकार खंड (2) के तहत मिलने वाले संवैधानिक संरक्षण (अदालती चुनौती से मुक्ति) को खो देती है। तब सरकार को अदालत में यह सिद्ध करना पड़ता है कि यह निर्णय वास्तव में सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा लिया गया था।

किसी राज्य में मंत्रियों के बीच विभागों के आवंटन के नियम कौन बनाता है?

राज्यपाल अनुच्छेद 166(3) के तहत ये नियम (Rules of Business) बनाते हैं। व्यवहार में, यह मुख्यमंत्री की सिफारिश और सलाह पर किया जाता है।

Quiz

अनुच्छेद 166 के तहत, राज्य सरकार के सभी कार्यपालिका कार्य किसके नाम पर व्यक्त किए जाने चाहिए?

Answer: राज्यपाल के

अनुच्छेद 166 का कौन सा खंड राज्यपाल को सरकारी कार्यों के सुगम संचालन और मंत्रियों के बीच विभागों के आवंटन के नियम बनाने की शक्ति देता है?

Answer: खंड (3)

Related Topics