Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 162 Simplified: राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार

किसी राज्य सरकार की प्रशासनिक (कार्यपालिका) शक्तियां उसकी कानून बनाने की शक्तियों के समान ही विस्तृत होती हैं। इसका अर्थ यह है कि राज्य की कार्यपालिका शाखा उन सभी विषयों का प्रबंधन और क्रियान्वयन कर सकती है जो राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List) के अंतर्गत आते हैं। हालांकि, समवर्ती सूची के मामलों में राज्य की शक्तियां केंद्र सरकार की शक्तियों के अधीन होती हैं।

Official Text

राज्य कि कार्यपालिका शिक्त का विस्तार–इस संविधान के उपबंधि के अधीन रहते हु ए किसी राज्य कि कार्यपालिका शिक्त का विस्तार उन विषयि पर होगा िजनके संबंध मि उस राज्य के विधान-मंडल को विधि बनाने कि शिक्त है : परंतु िजस विषय के संबंध मि राज्य के विधान-मंडल और संसद् को विधि बनाने कि शिक्त है उसमि राज्य कि कार्यपालिका शिक्त इस संविधान द्वारा या संसद् द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा, संघ या उसके प्राधिकारियि को अभिव्यक्त रूप से प्रदि कार्यपालिका शिक्त के अधीन और उससे परिसीमित होगी । मंति्र-परिषद्

Simple Meaning

किसी राज्य सरकार की प्रशासनिक (कार्यपालिका) शक्तियां उसकी कानून बनाने की शक्तियों के समान ही विस्तृत होती हैं। इसका अर्थ यह है कि राज्य की कार्यपालिका शाखा उन सभी विषयों का प्रबंधन और क्रियान्वयन कर सकती है जो राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List) के अंतर्गत आते हैं। हालांकि, समवर्ती सूची के मामलों में राज्य की शक्तियां केंद्र सरकार की शक्तियों के अधीन होती हैं।

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यह नियम तय करता है कि राज्य सरकार किन चीज़ों का प्रबंधन कर सकती है (जैसे पुलिस और अस्पताल) और राष्ट्रीय सरकार किन चीज़ों को संभालती है (जैसे सेना और रेलवे)।

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यह स्थापित करता है कि राज्य की कार्यपालिका शक्ति उसकी विधायी शक्तियों (Legislative Power) के समवर्ती और सह-विस्तृत होती है। इसलिए, राज्य कार्यपालिका सातवीं अनुसूची की सूची II (राज्य सूची) और सूची III (समवर्ती सूची) के विषयों पर विभागों का संचालन कर सकती है। हालांकि, समवर्ती सूची के विषयों पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति संसद या संविधान द्वारा सीधे संघ (Union) को दी गई कार्यकारी शक्ति के अधीन और सीमित होती है।

Example

राज्य सरकार लोक स्वास्थ्य (Public Health) से जुड़े नए दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) जारी कर सकती है (क्योंकि लोक स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है) बिना इसके लिए कोई नया कानून पारित कराए, बशर्ते यह किसी मौजूदा कानून का उल्लंघन न करता हो।

Key Takeaway

राज्य की कार्यपालिका शक्ति उसकी विधायी शक्तियों के समान होती है, लेकिन समवर्ती (साझा) विषयों पर यदि संसद कानून बनाए, तो राज्य की शक्ति केंद्र के अधीन हो जाती है।

FAQs

क्या राज्य कार्यपालिका वधायिका द्वारा पहले से कानून बनाए बिना किसी विषय पर कार्रवाई कर सकती है?

हाँ। ऐतिहासिक 'राम जवाया कपूर बनाम पंजाब राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्यपालिका शक्ति केवल कानूनों को लागू करने तक सीमित नहीं है। सरकार अपनी विधायी क्षमता के भीतर किसी भी विषय पर कार्यकारी कार्य कर सकती है, बशर्ते वह किसी मौजूदा कानून का उल्लंघन न करे या मूल अधिकारों का हनन न करे।

समवर्ती सूची के मामलों में राज्य की कार्यपालिका शक्ति पर क्या सीमाएं हैं?

यद्यपि राज्य समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बना सकता है, लेकिन उसकी कार्यपालिका शक्ति संविधान या संसद के किसी कानून द्वारा संघ या उसके प्राधिकरणों को स्पष्ट रूप से दी गई कार्यकारी शक्ति के अधीन और सीमित होगी।

Quiz

अनुच्छेद 162 के तहत किसी राज्य की कार्यपालिका शक्ति किसके सम-विस्तृत (Co-extensive) होती है?

Answer: राज्य की विधायी शक्ति के

किस ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्यपालिका शक्ति बिना पूर्व कानून के भी विस्तृत हो सकती है?

Answer: राम जवाया कपूर बनाम पंजाब राज्य

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