Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 156 Simplified: राज्यपाल की पदावधि

अनुच्छेद 156 बताता है कि राज्यपाल कितने समय तक अपना पद धारण करते हैं। हालांकि सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, लेकिन राज्यपाल राष्ट्रपति के 'प्रसादपर्यंत' (Pleasure of the President) पद पर बने रहते हैं (जिसका अर्थ है कि राष्ट्रपति उन्हें किसी भी समय हटा सकते हैं)। राज्यपाल राष्ट्रपति को लिखकर इस्तीफा दे सकते हैं, और वे तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक कि उनके उत्तराधिकारी कार्यभार नहीं संभाल लेते।

Official Text

राज्यपाल कि पदावधि–(1) राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपयति पद धारण करेगा । (2) राज्यपाल, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्तारि सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा । (3) इस अनु च्छेद के पू वर्गामी उपबंधि के अधीन रहते हु ए, राज्यपाल अपने पदग्रहण कि तारीख से पाँच वषर् कि अवधि तक पद धारण करेगा : ु सू ची द्वारा (1-11-1956 से) “पहलि अनु सू ची के भाग क मि के” शब्दि का लोप किया गया । ु सू ची द्वारा (1-11-1956 से) “का अथर् पहलि अनु सू ची के भाग क मि उिल्ल खित राज्य है” के स्थान पर प्रतिस्थापित । परन्तु राज्यपाल, अपने पद कि अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उरिाधिकारि अपना पदग्रहण नहीं कर लेता है ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 156 बताता है कि राज्यपाल कितने समय तक अपना पद धारण करते हैं। हालांकि सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, लेकिन राज्यपाल राष्ट्रपति के 'प्रसादपर्यंत' (Pleasure of the President) पद पर बने रहते हैं (जिसका अर्थ है कि राष्ट्रपति उन्हें किसी भी समय हटा सकते हैं)। राज्यपाल राष्ट्रपति को लिखकर इस्तीफा दे सकते हैं, और वे तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक कि उनके उत्तराधिकारी कार्यभार नहीं संभाल लेते।

Explain Like Ten

राज्यपाल का काम आम तौर पर 5 साल के लिए होता है, लेकिन राष्ट्रपति उन्हें इससे पहले भी हटा सकते हैं। राज्यपाल जब चाहें राष्ट्रपति को पत्र भेजकर अपना इस्तीफा दे सकते हैं।

Student Mode

यह राज्यपाल के कार्यकाल को नियंत्रित करता है। मुख्य बिंदु हैं: (1) राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है; (2) राज्यपाल राष्ट्रपति को संबोधित कर इस्तीफा दे सकता है; (3) सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, लेकिन वे उत्तराधिकारी के पद संभालने तक पद पर बने रहते हैं। बी.पी। सिंघल बनाम भारत संघ (B.P. Singhal v. Union of India) (2010) मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि 'राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत' का अर्थ बिना किसी ठोस कारण के मनमानी बर्खास्तगी नहीं है, और केंद्र का निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन है।

Example

यदि किसी राज्यपाल का 5 वर्ष का कार्यकाल समाप्त हो जाता है लेकिन अभी तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हुई है, तो निवर्तमान राज्यपाल संवैधानिक रिक्ति को रोकने के लिए पद पर बने रहते हैं और विधेयकों पर हस्ताक्षर व अन्य आधिकारिक कार्य जारी रखते हैं।

Key Takeaway

राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है लेकिन वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत कार्य करते हैं और उत्तराधिकारी की नियुक्ति होने तक पद पर बने रहते हैं।

FAQs

क्या केंद्र में नई सरकार आने पर किसी राज्यपाल को मनमाने ढंग से हटाया जा सकता है?

नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने बी.पी। सिंघल (B.P. Singhal) (2010) मामले में निर्णय दिया कि राज्यपालों को केवल इसलिए नहीं हटाया जा सकता क्योंकि उनकी विचारधारा अलग है या केंद्र सरकार बदल गई है। हटाने के वैध और ठोस कारण होने चाहिए।

राज्यपाल अपना इस्तीफा पत्र किसे सौंपता है?

राज्यपाल को अपना लिखित इस्तीफा पत्र भारत के राष्ट्रपति को संबोधित करना होता है।

Quiz

अनुच्छेद 156(1) के अनुसार, राज्यपाल किसके प्रसादपर्यंत पद धारण करता है?

Answer: भारत के राष्ट्रपति के

यदि राज्यपाल का 5 वर्ष का कार्यकाल समाप्त हो जाता है लेकिन किसी उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है, तो क्या होता है?

Answer: निवर्तमान राज्यपाल तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक नया उत्तराधिकारी पद नहीं संभाल लेता

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