Part V - The Union • अनुच्छेद
अनुच्छेद 146 Simplified: उच्चतम न्यायालय के अधिकारी और सेवक तथा व्यय
अनुच्छेद 146 न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखता है। यह भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को यह अधिकार देता है कि वे बिना सरकारी हस्तक्षेप के सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों और अधिकारियों की नियुक्ति कर सकें। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट का पूरा खर्च और कर्मचारियों का वेतन सीधे भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से दिया जाता है, यानी इसके लिए संसद में हर साल वोटिंग कराने की जरूरत नहीं होती, जिससे सरकार बजट रोककर कोर्ट पर दबाव नहीं बना सकती।
Official Text
(1) उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों की नियुक्तियाँ भारत का मुख्य न्यायमूर्ति करेगा या उस न्यायालय का ऐसा अन्य न्यायाधीश या अधिकारी करेगा जिसे वह निर्देशित करे: परन्तु राष्ट्रपति नियम द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि ऐसे मामलों में, जो नियम में विनिर्दिष्ट किए जाएँ, किसी ऐसे व्यक्ति को जो पहले से ही न्यायालय से संलग्न नहीं है, न्यायालय से संबंधित किसी पद पर संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श करके ही नियुक्त किया जाएगा, अन्यथा नहीं। (2) संसद् द्वारा बनाई गई विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों की सेवा की शर्तें ऐसी होंगी जो भारत के मुख्य न्यायमूर्ति या उस न्यायालय के ऐसे अन्य न्यायाधीश या अधिकारी द्वारा, जिसे भारत के मुख्य न्यायमूर्ति ने इस प्रयोजन के लिए नियम बनाने के लिए प्राधिकृत किया है, बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाएँ: परन्तु इस खंड के अधीन बनाए गए नियमों के लिए, जहाँ तक वे वेतनों, भत्तों, छुट्टी या पेंशनों से संबंधित हैं, राष्ट्रपति के अनुमोदन की अपेक्षा होगी। (3) उच्चतम न्यायालय के प्रशासनिक व्यय, जिनके अंतर्गत उस न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों को या उनके संबंध में देय सभी वेतन, भत्ते और पेंशन हैं, भारत की संचित निधि पर भारित होंगे और उस न्यायालय द्वारा ली गई फीसें या अन्य धन उस निधि का भाग होंगे।
Simple Meaning
अनुच्छेद 146 न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखता है। यह भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को यह अधिकार देता है कि वे बिना सरकारी हस्तक्षेप के सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों और अधिकारियों की नियुक्ति कर सकें। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट का पूरा खर्च और कर्मचारियों का वेतन सीधे भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से दिया जाता है, यानी इसके लिए संसद में हर साल वोटिंग कराने की जरूरत नहीं होती, जिससे सरकार बजट रोककर कोर्ट पर दबाव नहीं बना सकती।
Explain Like Ten
यह नियम कहता है कि सुप्रीम कोर्ट अपने मददगारों, क्लर्कों और सहायकों की नौकरी खुद तय करेगा और सरकार या नेता इसमें दखल नहीं दे सकते। उनका वेतन सीधे सरकारी खजाने (संचित निधि) से अपने आप दिया जाएगा ताकि न्यायालय निडर होकर काम कर सके।
Student Mode
यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Independence of Judiciary) को प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान कर सुरक्षित करता है। इसके तहत कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तें तय करने का अधिकार मुख्य न्यायाधीश को है। खंड (3) के अनुसार न्यायालय के प्रशासनिक व्यय 'भारत की संचित निधि' पर भारित (Charged upon the Consolidated Fund of India) होते हैं, जिससे ये विधायी मतदान से मुक्त रहते हैं।
Example
सुप्रीम कोर्ट के नए अधिकारियों और स्टेनो की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह मुख्य न्यायाधीश के नियंत्रण में होती है, न कि कानून मंत्रालय के। उनका वेतन हर महीने सरकारी खजाने से बिना किसी राजनीतिक अड़चन के अपने आप मिल जाता है।
Key Takeaway
सुप्रीम कोर्ट अपने कर्मचारियों की भर्ती खुद करता है और उसकी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए उसका बजट राजनीतिक प्रभाव से सुरक्षित रहता है।
FAQs
सुप्रीम कोर्ट के स्टाफ की नियुक्ति कौन करता है?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या उनके द्वारा निर्देशित कोई अन्य न्यायाधीश या अधिकारी करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक खर्चे किस निधि से दिए जाते हैं?
ये खर्च 'भारत की संचित निधि' (Consolidated Fund of India) पर भारित होते हैं, जिसका अर्थ है कि इन पर संसद में चर्चा तो हो सकती है पर वोटिंग नहीं होती।
Quiz
उच्च न्यायालय के प्रशासनिक व्यय किस पर भारित होते हैं?
Answer: राज्य की संचित निधि पर
कौन सा प्राधिकरण अधीनस्थ न्यायपालिका (Subordinate Judiciary) की नियुक्तियों, पदोन्नति और नियंत्रण को संभालता है?
Answer: संबंधित राज्य का उच्च न्यायालय (High Court)