Part V - The Union • अनुच्छेद
अनुच्छेद 145 Simplified: न्यायालय के नियम आदि
अनुच्छेद 145 सुप्रीम कोर्ट को यह शक्ति देता है कि वह अपनी कार्यप्रणाली, जैसे वकीलों के नियम, जमानत (Bail) की शर्तें, और फीस तय करने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी से अपने नियम खुद बना सके। साथ ही, यह अनिवार्य करता है कि संविधान की व्याख्या से जुड़े किसी भी बड़े मामले की सुनवाई के लिए कम से कम 5 जजों (संविधान पीठ - Constitution Bench) का होना आवश्यक है और सभी निर्णय खुली अदालत में सुनाए जाने चाहिए।
Official Text
(1) संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उच्चतम न्यायालय समय-समय पर, राष्ट्रपति के अनुमोदन से, न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया के साधारणतः विनियमन के लिए नियम बना सकेगा जिसके अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं, अर्थात्:— (क) उस न्यायालय में वकालत करने वाले व्यक्तियों के बारे में नियम; (ख) अपीलें सुनने की प्रक्रिया के बारे में और अपीलों से संबंधित अन्य विषयों के बारे में नियम; (ग) भाग 3 द्वारा प्रदत्त अधिकारों में से किसी के प्रवर्तन के लिए न्यायालय में कार्यवाहियों के बारे में नियम; (cc) अनुच्छेद 139क के अधीन कार्यवाहियों के बारे में नियम; (घ) अनुच्छेद 134 के खंड (1) के उपखंड (ग) के अधीन अपीलों को ग्रहण करने के बारे में नियम; (ङ) न्यायालय द्वारा सुनाए गए किसी निर्णय या दिए गए आदेश का जिन शर्तों के अधीन रहते हुए पुनर्विलोकन किया जा सकेगा, उनके बारे में और ऐसे पुनर्विलोकन की प्रक्रिया के बारे में नियम; (च) न्यायालय में किन्हीं कार्यवाहियों के और उनके आनुषंगिक खर्चों के बारे में तथा दी जाने वाली फीसों के बारे में नियम; (ग) जमानत मंजूर करने के बारे में नियम; (ह) कार्यवाहियों को रोकने के बारे में नियम; (Summary) उन अपीलों के संक्षेपतः अवधारण के लिए उपबंध करने वाले नियम जो तुच्छ या तंग करने वाली प्रतीत होती हैं; (j) अनुच्छेद 317 के खंड (1) में निर्दिष्ट जांचों के बारे में नियम। (2) खंड (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अनुच्छेद के अधीन बनाए गए नियम उन न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या नियत कर सकेंगे जो किसी प्रयोजन के लिए बैठेंगे और एकल न्यायाधीशों और खंड न्यायालयों की शक्तियों के लिए उपबंध कर सकेंगे। (3) जिस मामले में इस संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का कोई सारवान् प्रश्न अंतर्वलित है उसका विनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए या अनुच्छेद 143 के अधीन निर्देश की सुनवाई करने के प्रयोजन के लिए बैठने वाले न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या पाँच होगी: परन्तु जहाँ इस अध्याय के अनुच्छेद 132 से भिन्न किसी उपबंध के अधीन अपील की सुनवाई करने वाला न्यायालय पाँच से कम न्यायाधीशों से मिलकर बना है और सुनवाई के दौरान उसका समाधान हो जाता है कि अपील में संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का ऐसा सारवान् प्रश्न अंतर्वलित है जिसका अवधारण अपील के निपटारे के लिए आवश्यक है, वहाँ वह न्यायालय उस प्रश्न को राय के लिए ऐसे न्यायालय को निर्देशित करेगा जो इस खंड की अपेक्षानुसार गठित किया जाए और ऐसी राय प्राप्त होने पर अपील को उस राय के अनुरूप निपटाएगा। (4) उच्चतम न्यायालय का कोई निर्णय खुली अदालत में ही सुनाया जाएगा, अन्यथा नहीं, और अनुच्छेद 143 के अधीन कोई प्रतिवेदन खुली अदालत में दी गई राय के अनुसार ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं। (5) उच्चतम न्यायालय का कोई निर्णय और कोई ऐसी राय मामले की सुनवाई में उपस्थित न्यायाधीशों के बहुमत की सहमति से ही दी जाएगी, अन्यथा नहीं, किन्तु इस खंड की कोई बात किसी ऐसे न्यायाधीश को, जो सहमत नहीं है, अपना विसम्मत निर्णय या राय सुनाने से नहीं रोकेगी।
Simple Meaning
अनुच्छेद 145 सुप्रीम कोर्ट को यह शक्ति देता है कि वह अपनी कार्यप्रणाली, जैसे वकीलों के नियम, जमानत (Bail) की शर्तें, और फीस तय करने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी से अपने नियम खुद बना सके। साथ ही, यह अनिवार्य करता है कि संविधान की व्याख्या से जुड़े किसी भी बड़े मामले की सुनवाई के लिए कम से कम 5 जजों (संविधान पीठ - Constitution Bench) का होना आवश्यक है और सभी निर्णय खुली अदालत में सुनाए जाने चाहिए।
Explain Like Ten
यह नियम सुप्रीम कोर्ट को यह अधिकार देता है कि वह राष्ट्रपति जी की मंजूरी के साथ अपनी खुद की नियम पुस्तिका लिखे—जैसे कि जमानत कैसे मिलेगी, फीस कितनी होगी। साथ ही, यह भी तय करता है कि संविधान के बड़े सवालों को हल करने के लिए कम से कम 5 जज एक साथ बैठेंगे और वे खुली अदालत में फैसला सुनाएंगे।
Student Mode
यह उच्चतम न्यायालय को अपनी प्रक्रिया और पद्धति को विनियमित करने के लिए नियम बनाने की शक्ति (Rule-making power) देता है, जो राष्ट्रपति के अनुमोदन और संसदीय विधि के अधीन है। इसका खंड (3) अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो यह अनिवार्य करता है कि संविधान की व्याख्या से जुड़े सारवान् कानूनी प्रश्नों और अनुच्छेद 143 के सलाहकार निर्देशों की सुनवाई के लिए न्यूनतम कोरम 5 न्यायाधीशों (संविधान पीठ) का होना चाहिए। खंड (5) न्यायाधीशों के असहमति के अधिकार (Dissenting Judgment) की रक्षा करता है।
Example
जब सुप्रीम कोर्ट किसी बड़े संवैधानिक मुद्दे (जैसे समलैंगिकता या आधार कार्ड की वैधता) पर सुनवाई के लिए 5 जजों की विशेष पीठ बनाता है, तो वह अनुच्छेद 145(3) के नियमों का पालन कर रहा होता है।
Key Takeaway
सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति की मंजूरी से अपने नियम स्वयं बनाता है, और संवैधानिक मामलों के लिए कम से कम 5 जजों का होना अनिवार्य है।
FAQs
संविधान पीठ (Constitution Bench) के लिए न्यूनतम कितने जज होने चाहिए?
अनुच्छेद 145(3) के अनुसार, संविधान के निर्वचन (व्याख्या) से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए कम से कम 5 न्यायाधीशों का होना अनिवार्य है।
क्या सुप्रीम कोर्ट के नियम बनाने की शक्ति असीमित है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट के नियम संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के अधीन होते हैं और इन नियमों को लागू करने के लिए राष्ट्रपति का अनुमोदन आवश्यक है।
क्या कोई जज असहमति का फैसला सुना सकता है?
हाँ, अनुच्छेद 145(5) जजों को बहुमत से अलग असहमति का निर्णय (Dissenting Judgment) देने का पूरा अधिकार देता है, जिसे खुली अदालत में पढ़ा जाता है।
Quiz
अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान पीठ (Constitution Bench) के गठन के लिए न्यूनतम कितने न्यायाधीशों की आवश्यकता है?
Answer: 5 जज
अनुच्छेद 145 के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाए गए नियमों के लिए किसकी मंजूरी आवश्यक है?
Answer: राष्ट्रपति की