Part V - The Union • अनुच्छेद

अनुच्छेद 143 Simplified: उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति

अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट से 'विशेष कानूनी सलाह' लेने का अधिकार देता है। यदि देश के राष्ट्रपति को किसी बहुत जटिल कानून या तथ्य पर असमंजस हो, तो वे उस मामले को सुप्रीम कोर्ट के पास राय (Opinion) जानने के लिए भेज सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट उस पर अपनी सलाह देता है। यद्यपि राष्ट्रपति इस सलाह को मानने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं, फिर भी सरकार इसका बहुत सम्मान करती है।

Official Text

(1) यदि किसी समय राष्ट्रपति को प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है, या उत्पन्न होने की संभावना है, जो ऐसे प्रकार का और ऐसे व्यापक महत्त्व का है कि उस पर उच्चतम न्यायालय की राय प्राप्त करना समीचीन है, तो वह उस प्रश्न को विचार करने के लिए उस न्यायालय को निर्देशित कर सकेगा और वह न्यायालय, ऐसी सुनवाई के पश्चात् जो वह ठीक समझता है, राष्ट्रपति को उस पर अपनी राय प्रतिवेदित कर सकेगा। (2) राष्ट्रपति अनुच्छेद 131 के परंतुक में किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार के विवाद को, जो उक्त परंतुक में वर्णित है, राय देने के लिए उच्चतम न्यायालय को निर्देशित कर सकेगा और उच्चतम न्यायालय, ऐसी सुनवाई के पश्चात् जो वह ठीक समझता है, राष्ट्रपति को उस पर अपनी राय प्रतिवेदित करेगा।

Simple Meaning

अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट से 'विशेष कानूनी सलाह' लेने का अधिकार देता है। यदि देश के राष्ट्रपति को किसी बहुत जटिल कानून या तथ्य पर असमंजस हो, तो वे उस मामले को सुप्रीम कोर्ट के पास राय (Opinion) जानने के लिए भेज सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट उस पर अपनी सलाह देता है। यद्यपि राष्ट्रपति इस सलाह को मानने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं, फिर भी सरकार इसका बहुत सम्मान करती है।

Explain Like Ten

यदि राष्ट्रपति जी को किसी बहुत कठिन कानून के नियम को समझने में दिक्कत हो, तो वे सुप्रीम कोर्ट के जजों से पूछ सकते हैं—'आपकी राय में इसका क्या मतलब है?' ताकि वे सही और निष्पक्ष निर्णय ले सकें।

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यह उच्चतम न्यायालय की परामर्शदात्री या सलाहकार अधिकारिता (Advisory Jurisdiction) से संबंधित है। राष्ट्रपति जन महत्व के किसी भी विधि या तथ्य के प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट से राय मांग सकते हैं। खंड (1) के मामलों में राय देना सुप्रीम कोर्ट का विवेकाधिकार है, जबकि खंड (2) (संविधान पूर्व की संधियों से जुड़े विवाद) के मामलों में राय देना सुप्रीम कोर्ट के लिए अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट की राय बाध्यकारी नहीं होती।

Example

यदि सरकार कोई ऐतिहासिक संधि या जटिल कानून बनाना चाहती है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वह पूरी तरह वैध हो, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 143 का उपयोग कर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों से उनकी राय मांगते हैं।

Key Takeaway

राष्ट्रपति देश के व्यापक हित में महत्वपूर्ण विधिक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट से कानूनी सलाह ले सकते हैं।

FAQs

क्या सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी है?

नहीं, राष्ट्रपति सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसी प्रकार सुप्रीम कोर्ट भी खंड (1) के तहत राय देने से इनकार कर सकता है (जैसा कि बाबरी मस्जिद मामले में उसने राय देने से मना कर दिया था)।

क्या इसका उपयोग पहले किया गया है?

हाँ, इसका उपयोग कई ऐतिहासिक मामलों में किया गया है, जैसे दिल्ली लॉ एक्ट केस, केरल शिक्षा विधेयक और राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का विवाद।

Quiz

अनुच्छेद 143 के तहत सुप्रीम कोर्ट से परामर्श या सलाह मांगने का अधिकार किसे प्राप्त है?

Answer: राष्ट्रपति को

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