Part V - The Union • अनुच्छेद
अनुच्छेद 142 Simplified: उच्चतम न्यायालय की डिक्री और आदेशों का प्रवर्तन और प्रकटीकरण आदि के बारे में आदेश
अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट की सबसे अनोखी 'महा-शक्ति' है। यह कहता है कि यदि किसी मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए देश का कोई कानून अधूरा है या स्थिति बहुत जटिल है, तो सुप्रीम कोर्ट मामले के दोनों पक्षों के साथ 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए कोई भी विशेष आदेश दे सकता है। यह कानून की तकनीकी कमियों को दूर कर न्याय की जीत सुनिश्चित करता है।
Official Text
(1) उच्चतम न्यायालय अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए ऐसी डिक्री पारित कर सकेगा या ऐसा आदेश कर सकेगा जो उसके समक्ष लंबित किसी वाद या मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक हो, और इस प्रकार पारित की गई डिक्री या किया गया आदेश संपूर्ण भारत के राज्यक्षेत्र में ऐसी रीति से, जो संसद् द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन विहित की जाए, और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक, ऐसी रीति से जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा विहित करे, प्रवर्तनीय होगा। (2) संसद् द्वारा इस निमित्त बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उच्चतम न्यायालय को संपूर्ण भारत के राज्यक्षेत्र के संबंध में किसी व्यक्ति को हाजिर कराने, दस्तावेजों के प्रकटीकरण या पेश कराने अथवा अपने किसी अवमान का अन्वेषण करने या उसे दंडित करने के प्रयोजन के लिए कोई आदेश करने की पूरी शक्ति होगी।
Simple Meaning
अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट की सबसे अनोखी 'महा-शक्ति' है। यह कहता है कि यदि किसी मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए देश का कोई कानून अधूरा है या स्थिति बहुत जटिल है, तो सुप्रीम कोर्ट मामले के दोनों पक्षों के साथ 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए कोई भी विशेष आदेश दे सकता है। यह कानून की तकनीकी कमियों को दूर कर न्याय की जीत सुनिश्चित करता है।
Explain Like Ten
मान लीजिए कि कोई खेल खेला जा रहा है जिसमें नियमों की किताब से एक पन्ना गायब है। अनुच्छेद 142 एक 'सुपर जज' (Super Judge) की तरह है जो उस पल के लिए एक विशेष नियम बना सकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि खेल सभी के लिए निष्पक्ष रहे।
Student Mode
यह सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण और अंतर्निहित शक्तियों (Plenary and Inherent powers) का स्रोत है। इसके तहत न्यायालय किसी भी वाद में 'पूर्ण न्याय' (Complete justice) करने के लिए स्वविवेक से आदेश जारी कर सकता है। भोपाल गैस त्रासदी और अयोध्या मामले जैसे बड़े मामलों में इसका व्यापक प्रयोग हुआ है। हालांकि, न्यायिक संयम के सिद्धांत के अनुसार, इसका उपयोग संसद के स्पष्ट कानूनों की अवहेलना करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
Example
ऐतिहासिक अयोध्या फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी विवाद से अलग हटकर संतुलन बनाने के लिए अनुच्छेद 142 का उपयोग किया और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया, ताकि पूर्ण न्याय हो सके।
Key Takeaway
अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को न्याय की रक्षा के लिए तकनीकी नियमों से ऊपर उठकर 'पूर्ण न्याय' करने की अनुमति देता है।
FAQs
क्या अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट बने हुए कानूनों को बदल सकता है?
आमतौर पर नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने खुद माना है कि वह अनुच्छेद 142 का उपयोग संसद के स्पष्ट कानूनों को दरकिनार करने के लिए नहीं कर सकता। यह केवल कानून में मौजूद रिक्तियों (गैप्स) को भरने और घोर अन्याय को रोकने के लिए एक सहायक साधन है।
इस शक्ति का उपयोग कौन कर सकता है?
यह अत्यंत विशिष्ट शक्ति केवल और केवल भारत के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के पास ही है, किसी अन्य अदालत के पास नहीं।
इसे 'पूर्ण न्याय' की शक्ति क्यों कहा जाता है?
चूंकि यह कानून के सूखे शब्दों की जगह मामले की सच्ची परिस्थितियों और मानवीय न्याय को प्राथमिकता देकर फैसला करने का अधिकार देती है।
Quiz
किस अदालत के पास 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए कोई भी आवश्यक आदेश देने की शक्ति है?
Answer: उच्चतम न्यायालय
अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट की शक्ति किस प्रकार की है?
Answer: पूर्ण और अंतर्निहित (Plenary/Inherent)