Part V - The Union • अनुच्छेद
अनुच्छेद 139 Simplified: कुछ रिटें निकालने की शक्तियों का उच्चतम न्यायालय को प्रदत्त किया जाना
अनुच्छेद 32 के तहत, उच्चतम न्यायालय केवल मूल अधिकारों (Fundamental Rights) की रक्षा के लिए ही रिट (Writs - विशेष कानूनी आदेश) जारी कर सकता है। अनुच्छेद 139 संसद को यह शक्ति देता है कि वह कानून बनाकर उच्चतम न्यायालय को अन्य उद्देश्यों (जैसे सामान्य कानूनी या वैधानिक अधिकारों की रक्षा) के लिए भी रिट जारी करने का अधिकार दे सके।
Official Text
संसद् विधि द्वारा उच्चतम न्यायालय को बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण रिटों में से किसी प्रकार की रिटें, जो अनुच्छेद 32 के खंड (2) में निर्दिष्ट प्रयोजनों से भिन्न किन्हीं प्रयोजनों के लिए हों, ऐसी कोई रिटें निकालने की शक्ति प्रदान कर सकेगी।
Simple Meaning
अनुच्छेद 32 के तहत, उच्चतम न्यायालय केवल मूल अधिकारों (Fundamental Rights) की रक्षा के लिए ही रिट (Writs - विशेष कानूनी आदेश) जारी कर सकता है। अनुच्छेद 139 संसद को यह शक्ति देता है कि वह कानून बनाकर उच्चतम न्यायालय को अन्य उद्देश्यों (जैसे सामान्य कानूनी या वैधानिक अधिकारों की रक्षा) के लिए भी रिट जारी करने का अधिकार दे सके।
Explain Like Ten
आमतौर पर, आप केवल अपने मूल अधिकारों को बचाने के लिए ही सुप्रीम कोर्ट से विशेष आदेश (रिट) मांग सकते हैं। लेकिन यह नियम संसद को यह अधिकार देता है कि वह कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट को अन्य साधारण नियमों के लिए भी ऐसे आदेश जारी करने की शक्ति दे दे।
Student Mode
यह संसद को विधायी शक्ति प्रदान करता है जिसके द्वारा वह उच्चतम न्यायालय की रिट अधिकारिता का विस्तार मूल अधिकारों के प्रवर्तन (अनुच्छेद 32) से भिन्न प्रयोजनों के लिए भी कर सकती है। यह उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226 - जिसके पास पहले से ही विस्तृत रिट अधिकारिता है) के बीच रिट शक्तियों के अंतर को पाटने का एक प्रावधान है।
Example
यदि किसी नागरिक के सामान्य संपत्ति अधिकार का उल्लंघन होता है और संसद चाहती है कि वे सीधे सुप्रीम कोर्ट जाकर आदेश ले सकें, तो संसद अनुच्छेद 139 के तहत कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट को यह अधिकार दे सकती है।
Key Takeaway
संसद उच्चतम न्यायालय को मूल अधिकारों के अतिरिक्त अन्य अधिकारों के संरक्षण के लिए भी रिट जारी करने का अधिकार दे सकती है।
FAQs
उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता में क्या अंतर है?
अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट की रिट (Writ) अधिकारिता केवल मूल अधिकारों के हनन तक सीमित है, जो स्वयं में एक मूल अधिकार है। अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों के पास मूल अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों के हनन पर भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति है।
क्या संसद ने कभी अनुच्छेद 139 के तहत सुप्रीम कोर्ट की रिट शक्ति बढ़ाने वाला कानून बनाया है?
नहीं, संसद ने अभी तक ऐसा कोई सामान्य कानून नहीं बनाया है जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट की रिट अधिकारिता को अन्य कानूनी प्रयोजनों के लिए विस्तारित किया गया हो।
Quiz
अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट केवल मूल अधिकारों के लिए रिट जारी करता है। संसद को अन्य प्रयोजनों के लिए रिट अधिकार देने की अनुमति कौन सा अनुच्छेद देता है?
Answer: अनुच्छेद 139
वर्तमान में किसकी रिट अधिकारिता अधिक विस्तृत है: अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट की या अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों की?
Answer: उच्च न्यायालयों की