Part V - The Union • अनुच्छेद
अनुच्छेद 137 Simplified: निर्णयों या आदेशों का उच्चतम न्यायालय द्वारा पुनर्विलोकन
अनुच्छेद 137 उच्चतम न्यायालय को अपने स्वयं के निर्णयों और आदेशों की समीक्षा (पुनर्विलोकन) करने और उन्हें सुधारने की शक्ति देता है। यद्यपि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम होता है, लेकिन यदि बाद में यह पता चले कि फैसले में कोई गंभीर कानूनी भूल थी या कोई नया महत्वपूर्ण सबूत सामने आया है, तो न्यायालय अपने फैसले को बदल सकता है।
Official Text
संसद् द्वारा बनाई गई किसी विधि के या अनुच्छेद 145 के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उच्चतम न्यायालय को अपने द्वारा सुनाए गए निर्णय या दिए गए आदेश का पुनर्विलोकन करने की शक्ति होगी।
Simple Meaning
अनुच्छेद 137 उच्चतम न्यायालय को अपने स्वयं के निर्णयों और आदेशों की समीक्षा (पुनर्विलोकन) करने और उन्हें सुधारने की शक्ति देता है। यद्यपि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम होता है, लेकिन यदि बाद में यह पता चले कि फैसले में कोई गंभीर कानूनी भूल थी या कोई नया महत्वपूर्ण सबूत सामने आया है, तो न्यायालय अपने फैसले को बदल सकता है।
Explain Like Ten
आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट की बात आखिरी होती है। लेकिन अगर उन्हें खुद एहसास हो कि उन्होंने कोई बड़ी भूल कर दी है या उन्हें कोई नया जरूरी सबूत मिले, तो वे अपने ही फैसले को दोबारा जांच कर बदल सकते हैं।
Student Mode
यह सुप्रीम कोर्ट को स्वयं के निर्णयों का पुनर्विलोकन (Review) करने की शक्ति देता है। सुप्रीम कोर्ट रूल्स, 2013 के अनुसार, समीक्षा के तीन सीमित आधार हैं: नए महत्वपूर्ण साक्ष्य की खोज, रिकॉर्ड पर प्रत्यक्ष दिखने वाली त्रुटि (Error apparent on the face of the record), या कोई अन्य पर्याप्त कारण।
Example
यदि सुप्रीम कोर्ट ने किसी मामले में अंतिम निर्णय दे दिया, लेकिन बाद में याचिकाकर्ता ने साबित किया कि अदालत ने कानून की किसी बहुत महत्वपूर्ण धारा की अनदेखी की थी, तो वे 'पुनर्विलोकन याचिका' (Review Petition) दायर कर सकते हैं।
Key Takeaway
सुप्रीम कोर्ट न्याय सुनिश्चित करने के लिए अपने खुद के फैसलों की गलतियों को सुधार सकता है।
FAQs
पुनर्विलोकन याचिका (Review Petition) किस आधार पर दायर की जा सकती है?
यह पूरे मामले की दोबारा सुनवाई नहीं है। यह केवल तीन आधारों पर दी जा सकती है: नए सबूत का मिलना, फैसले में साफ तौर पर दिखने वाली बड़ी गलती का होना, या कोई अन्य विशेष न्यायसंगत कारण।
पुनर्विलोकन याचिका खारिज होने के बाद क्या कोई उपाय बचता है?
हाँ, पुनर्विलोकन याचिका खारिज होने के बाद अंतिम उपाय के रूप में 'उपचारात्मक याचिका' (Curative Petition) दायर की जा सकती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रूपा अशोक हुर्रा मामले (2002) में न्याय के हनन को रोकने के लिए मान्यता दी थी।
समीक्षा याचिका दायर करने की समय सीमा क्या है?
यह याचिका निर्णय या आदेश दिए जाने की तारीख से 30 दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिए।
Quiz
अनुच्छेद 137 के तहत पुनर्विलोकन याचिका निर्णय के कितने दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिए?
Answer: 30 दिन
किस प्रसिद्ध मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 'उपचारात्मक याचिका' (Curative Petition) की अवधारणा को स्थापित किया था?
Answer: रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा