Part V - The Union • अनुच्छेद
अनुच्छेद 134 Simplified: दांडिक विषयों में उच्चतम न्यायालय की अपीली अधिकारिता
अनुच्छेद 134 आपराधिक मामलों (Criminal Cases) में उच्चतम न्यायालय में अपील का अधिकार देता है। यदि निचली अदालत ने किसी को बरी कर दिया हो, लेकिन उच्च न्यायालय ने उस फैसले को उलट कर उसे मृत्युदंड (मौत की सजा) दे दिया हो, तो आरोपी को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का पूर्ण अधिकार होता है। अन्य आपराधिक मामलों में अपील के लिए उच्च न्यायालय के प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।
Official Text
(1) भारत के राज्यक्षेत्र में किसी उच्च न्यायालय की दांडिक कार्यवाही में दिए गए किसी निर्णय, अंतिम आदेश या दंडादेश की अपील उच्चतम न्यायालय में होगी यदि— (क) उस उच्च न्यायालय ने अपील में किसी अभियुक्त व्यक्ति की दोषमुक्ति के आदेश को उलट दिया है और उसको मृत्यु दंडादेश दिया है; या (ख) उस उच्च न्यायालय ने अपने प्राधिकार के अधीनस्थ किसी न्यायालय से किसी मामले को विचारण के लिए अपने पास मँगा लिया है और ऐसे विचारण में अभियुक्त व्यक्ति को सिद्धदोष ठहराया है और उसको मृत्यु दंडादेश दिया है; या (ग) वह उच्च न्यायालय अनुच्छेद 134क के अधीन प्रमाणित कर देता है कि मामला उच्चतम न्यायालय में अपील किए जाने योग्य है: परन्तु उपखंड (ग) के अधीन अपील ऐसे उपबंधों के अधीन रहते हुए होगी जो अनुच्छेद 145 के खंड (1) के अधीन इस निमित्त बनाए जाएँ और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए होगी जो उच्च न्यायालय नियत या अपेक्षित करे। (2) संसद् विधि द्वारा उच्चतम न्यायालय को भारत के राज्यक्षेत्र में किसी उच्च न्यायालय की दांडिक कार्यवाही में दिए गए किसी निर्णय, अंतिम आदेश या दंडादेश की अपील ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, जो ऐसी विधि में विनिर्दिष्ट की जाएँ, ग्रहण करने और सुनने की अतिरिक्त शक्ति दे सकेगी।
Simple Meaning
अनुच्छेद 134 आपराधिक मामलों (Criminal Cases) में उच्चतम न्यायालय में अपील का अधिकार देता है। यदि निचली अदालत ने किसी को बरी कर दिया हो, लेकिन उच्च न्यायालय ने उस फैसले को उलट कर उसे मृत्युदंड (मौत की सजा) दे दिया हो, तो आरोपी को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का पूर्ण अधिकार होता है। अन्य आपराधिक मामलों में अपील के लिए उच्च न्यायालय के प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।
Explain Like Ten
यदि कोई छोटी अदालत कहती है कि कोई व्यक्ति बेगुनाह है, लेकिन बड़ी अदालत (उच्च न्यायालय) उस फैसले को बदलकर उसे मौत की सजा सुना देती है, तो उस व्यक्ति के पास सुप्रीम कोर्ट जाकर अपनी बात रखने का पूरा अधिकार होता है।
Student Mode
यह आपराधिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय अधिकारिता को परिभाषित करता है। यदि उच्च न्यायालय ने अभियुक्त को दोषमुक्त करने के निर्णय को बदलकर मृत्युदंड दिया हो, तो यह अपील का एक पूर्ण अधिकार (Absolute Right) बन जाता है। अन्य मामलों में प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। संसद को आपराधिक अपीलीय अधिकारिता का विस्तार करने की शक्ति दी गई है।
Example
यदि एक जिला अदालत ने हत्या के आरोपी को बरी कर दिया, लेकिन उच्च न्यायालय ने सरकारी अपील पर उसे दोषी मानकर मौत की सजा सुना दी, तो आरोपी बिना किसी रुकावट के सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है।
Key Takeaway
उच्च न्यायालय द्वारा दी गई मौत की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सीधे अपील करना नागरिक का अधिकार है।
FAQs
आपराधिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट में अपील कब एक पूर्ण अधिकार बन जाती है?
जब उच्च न्यायालय दोषमुक्ति (Acquittal) को उलट कर अभियुक्त को मृत्युदंड देता है, या अधीनस्थ अदालत से मामला अपने पास मँगाकर सीधे मृत्युदंड देता है। इसके लिए किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होती।
क्या संसद सुप्रीम कोर्ट की आपराधिक अपीलीय अधिकारिता का विस्तार कर सकती है?
हाँ, संसद ने इस शक्ति का उपयोग करते हुए 'उच्चतम न्यायालय (आपराधिक अपीलीय अधिकारिता का विस्तार) अधिनियम, 1970' पारित किया, जिसके तहत अब कुछ अन्य मामलों में भी (जैसे उम्रकैद) सीधे अपील की जा सकती है।
Quiz
अनुच्छेद 134 के तहत, किस सजा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील का पूर्ण अधिकार होता है यदि उच्च न्यायालय ने दोषमुक्ति को उलट दिया हो?
Answer: मृत्युदंड
किसके पास सुप्रीम कोर्ट की आपराधिक अपीलीय अधिकारिता का विस्तार करने की शक्ति है?
Answer: संसद