Part V - The Union • अनुच्छेद

अनुच्छेद 125 Simplified: न्यायाधीशों के वेतन आदि

अनुच्छेद 125 उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते और पेंशन को सुनिश्चित करता है। इन वित्तीय प्रावधानों को संसद द्वारा निर्धारित किया जाता है और ये भारत की संचित निधि से दिए जाते हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि नियुक्ति के बाद किसी भी न्यायाधीश के वेतन को उनके कार्यकाल के दौरान उनके लिए प्रतिकूल रूप से नहीं बदला जा सकता — जो न्यायिक स्वतंत्रता की गारंटी है।

Official Text

्यायाधीशि के वेतन, आदि– [(1) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशि को ऐसे वेतनि का संदाय किया जाएगा जो संसद, विधि द्वारा, अवधारति करे और जब तक इस नमििि इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसे वेतनि का संदाय किया जाएगा जो दू सरि अनुसूची मि वनिदिरि्ष्ट हि ।] (2) प्रत्येक न्यायाधीश ऐसे वशिेषाधकिारि और भिि का तथा अनु पसि्थति छु ट्टि और पि शन के संबंध मि ऐसे अधिकारि का, जो संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन समय-समय पर अवधारति किए जाएं और जब तक इस प्रकार अवधारति नहीं किए जाते हि तब तक ऐसे वशिेषाधकिारि, भिि और अधिकारि का जो दू सरि अनुसूची मि वनिदिरि्ष्ट हि , हकदार होगा : प्रतिस्थापित । परन्तु किसी न्यायाधीश के वशिेषाधकिारि और भिि मि तथा अनु पसि्थति छु ट्टि या पि शन के संबंध मि उसके अधिकारि मि उसकी नियुक्ति के पश्चात ् उसके लिए अलाभकारि परिवर्तन नहीं किया जाएगा ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 125 उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते और पेंशन को सुनिश्चित करता है। इन वित्तीय प्रावधानों को संसद द्वारा निर्धारित किया जाता है और ये भारत की संचित निधि से दिए जाते हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि नियुक्ति के बाद किसी भी न्यायाधीश के वेतन को उनके कार्यकाल के दौरान उनके लिए प्रतिकूल रूप से नहीं बदला जा सकता — जो न्यायिक स्वतंत्रता की गारंटी है।

Explain Like Ten

यह सुनिश्चित करने के लिए कि न्यायाधीश बिना यह डर के निष्पक्ष फैसले दे सकें कि सरकार उनका वेतन काट देगी, उनका वेतन संसद द्वारा तय किया जाता है और उनके कार्यकाल के दौरान घटाया नहीं जा सकता। उनका वेतन सुनिश्चित है!

Student Mode

अनुच्छेद 125 उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है: (1) वेतन संसद द्वारा विधि से निर्धारित; (2) कानून के अभाव में दूसरी अनुसूची लागू; (3) महत्त्वपूर्ण रूप से, नियुक्ति के बाद किसी न्यायाधीश के विशेषाधिकारों, भत्तों, अवकाश या पेंशन के संबंध में अधिकारों में उनके लिए प्रतिकूल परिवर्तन नहीं किया जा सकता। वेतन संचित निधि (अनुच्छेद 112) पर भारित होता है और मतदान के अधीन नहीं। एकमात्र अपवाद अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल है।

Example

किसी राजनीतिक विवाद या बजट कटौती के दौरान भी सरकार किसी बैठे हुए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश का वेतन नहीं घटा सकती। अनुच्छेद 125 के अनुसार, वेतन केवल दुर्लभ वित्तीय आपातकाल में ही कम किया जा सकता है।

Key Takeaway

अनुच्छेद 125 यह सुनिश्चित करता है कि नियुक्ति के बाद न्यायाधीश का वेतन और सुविधाएं प्रतिकूल रूप से नहीं बदली जा सकतीं।

FAQs

क्या सरकार किसी न्यायाधीश का कार्यकाल के दौरान वेतन घटा सकती है?

नहीं। अनुच्छेद 125(2) स्पष्ट रूप से नियुक्ति के बाद किसी न्यायाधीश के विशेषाधिकारों, भत्तों, अवकाश या पेंशन में उनके लिए प्रतिकूल परिवर्तन पर रोक लगाता है।

किस परिस्थिति में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश का वेतन घटाया जा सकता है?

एकमात्र अपवाद यह है कि जब संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल घोषित हो।

Quiz

किसी न्यायाधीश के विशेषाधिकार, भत्ते और वेतन उनके लिए प्रतिकूल रूप से नहीं बदले जा सकते, सिवाय:

Answer: वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) के दौरान

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन किस निकाय द्वारा निर्धारित किया जाता है?

Answer: संसद द्वारा विधि से

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