Part V - The Union • अनुच्छेद

अनुच्छेद 124क Simplified: राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग

अनुच्छेद 124क ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए 'कॉलेजियम' प्रणाली के स्थान पर 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC)' की शुरुआत की। हालांकि, 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया।

Official Text

124क। राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग—(1) एक आयोग गठित किया जाएगा जिसे राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग कहा जाएगा जो निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात्:—(क) भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, पदेन अध्यक्ष; (ख) उच्चतम न्यायालय के दो अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश, पदेन सदस्य; (ग) संघ का विधि और न्याय मंत्री, पदेन सदस्य; (घ) दो प्रतिष्ठित व्यक्ति, सदस्य। [निष्क्रिय — सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2015 में असंवैधानिक घोषित]

Simple Meaning

अनुच्छेद 124क ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए 'कॉलेजियम' प्रणाली के स्थान पर 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC)' की शुरुआत की। हालांकि, 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया।

Explain Like Ten

कल्पना करें कि सरकार को खेल के सभी रेफरी चुनने का मौका मिल जाए। रेफरी सरकार का पक्ष ले सकते हैं! इसे रोकने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में NJAC के नियम को खारिज कर दिया, ताकि न्यायाधीशों का चुनाव राजनेताओं के प्रभाव से मुक्त रहे।

Student Mode

अनुच्छेद 124क को कॉलेजियम प्रणाली के स्थान पर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) स्थापित करने के लिए 99वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था। आयोग में शामिल थे: CJI (अध्यक्ष), दो वरिष्ठ SC न्यायाधीश, संघ के विधि मंत्री और दो प्रतिष्ठित व्यक्ति। ऐतिहासिक 'उच्चतम न्यायालय अधिवक्ता-अभिलेख संघ बनाम भारत संघ (2015)' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 99वें संशोधन और NJAC को असंवैधानिक घोषित किया, यह कहते हुए कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है, जो मूल ढांचे का हिस्सा है।

Example

99वें संशोधन ने अनुच्छेद 124क के तहत NJAC की स्थापना की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चतुर्थ न्यायाधीश मामले (2015) में इसे इस आधार पर खारिज कर दिया कि आयोग में विधि मंत्री की उपस्थिति से न्यायाधीशों की नियुक्ति में राजनीतिक हस्तक्षेप हो सकता था।

Key Takeaway

अनुच्छेद 124क ने NJAC बनाया था, लेकिन न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया गया।

FAQs

अनुच्छेद 124क के तहत प्रस्तावित NJAC का गठन कैसा था?

NJAC में 6 सदस्य थे: (1) भारत के मुख्य न्यायाधीश (अध्यक्ष); (2) दो वरिष्ठतम उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश; (3) संघ के विधि और न्याय मंत्री; (4) प्रधानमंत्री, CJI और विपक्ष के नेता की समक्षति द्वारा नामित दो प्रतिष्ठित व्यक्ति।

2015 में सुप्रीम कोर्ट ने NJAC को क्यों खारिज किया?

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि संघ के विधि मंत्री और दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों की शामिलगी से कार्यपालिका न्यायाधीशों के चयन में हस्तक्षेप कर सकती थी, जिससे 'न्यायपालिका की स्वतंत्रता' — जो संविधान के मूल ढांचे का अंग है — का उल्लंघन होता।

NJAC के खारिज होने के बाद न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कौन सी प्रणाली अपनाई जाती है?

कॉलेजियम प्रणाली पुनः बहाल हुई। इस प्रणाली में CJI और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीशों का एक मंच राष्ट्रपति को नियुक्तियों की सिफारिश करता है।

Quiz

किस संविधान संशोधन ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) को प्रस्तुत किया?

Answer: 99वां संशोधन

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में NJAC को इसलिए खारिज किया क्योंकि यह किसका उल्लंघन करता था?

Answer: न्यायपालिका की स्वतंत्रता का

Related Topics