Part V - The Union • अनुच्छेद
अनुच्छेद 124 Simplified: उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन
अनुच्छेद 124 भारत के उच्चतम न्यायालय का 'जन्म प्रमाण-पत्र' है। यह देश की सर्वोच्च अदालत की स्थापना करता है और बताता है कि मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों को कैसे नियुक्त किया जाता है और उन्हें कैसे हटाया जा सकता है।
Official Text
च्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन–(1) भारत का एक उच्चतम न्यायालय होगा जो भारत के मु ख्य न्यायमू तरि् और, जब तक संसद विधि द्वारा अधिक संख्या वहिति नहीं करती है तब तक, सात ∗ से अनधकी अन्य न्यायाधीशि से मलिकर बनेगा । (2) [अनुच्छेद 124क मि नदिरि्ष्ट राष्ट्रयि न्यायकी नियुक्ति आयोग की सिफारिश पर], राष्ट्रपति अपने हस्तारि और मु द्रा सहति अधपित्र द्वारा उच्चतम न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश को नयिु क्त करेगा और वह न्यायाधीश तब तक पद धारण करेगा जब तक वह पि सठ वषर् की आयु प्राप्त नहीं कर लेता है : [* * * * *] [परन्तु ],– (क) कोई न्यायाधीश, राष्ट्रपति को संबोधति अपने हस्तारि सहति लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा ; (ख) किसी न्यायाधीश को खंड (4) मि उपबंधति रीति से उसके पद से हटाया जा सकेगा ।अंतःस्थापित किया गया था और संविधान (चवालीसवें संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 16 द्वारा ( 20- 6-1979 से) लोप किया गया । ∗ उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 (20 19 का 37) की धारा 2 द्वारा (9-8-2019 से) अब "ति तीस" । राज्यि के उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीशि से परामशर् करने के पश्चात ् , जिनसे राष्ट्रपति इस प्रयोजन के लिए परा मशर् करना आवश्यक समझे" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । यह संशोधन सु प्रीम कोटर् एडवोकेट्स आन रकिाडर् एसोसएिशन और अन्य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 वाले मामले मि उच्चतम न्यायालय के तारीख 16- 10- 2015 के आदेश द्वारा अभखिंडति कर दिया गया है । ु क का लोप किया गया । संशोधन के पू वर् यह नमि्नानु सार था-- “परन्तु मु ख्य न्यायमू तरि् से भनि्न किसी न्यायाधीश की नियुक्ति की दशा मि भारत के मु ख्य न्यायमू तरि् से सदैव परामशर् की या जाएगा :”। यह संशोधन सु प्रीम कोटर् एडवोकेट्स आन रकिाडर् एसोसएिशन बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 वाले मामले मि उच्चतम न्यायालय के तारीख 16- 10- 2015 के आदेश द्वारा अभखिंडति कर दिया गया है । ु यह और कि” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । यह संशोधन सु प्रीम कोटर् एडवोकेट्स आन रकिाडर् एसोसएिशन और अन्य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 वाले मामले मि उच्चतम न्यायालय के तारीख 16- 10- 2015 के आदेश द्वारा अभखिंडति कर दिया गया है । [(2क) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की आयु ऐसे प्राधकिारि द्वारा और ऐसी रीति से अवधारति की जाएगी जिसका संसद विधि द्वारा उपबंध करे ।] (3) कोई व्यक्ति, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप मि नियुक्ति के लिए तभी अहरि्त होगा जब वह भारत का नागरिकोंि है और– (क) किसी उच्च न्यायालय का या ऐसे दो या अधिक न्यायालयि का लगातार कम से कम पाँच वषर् तक न्यायाधीश रहा है ; या (ख) किसी उच्च न्यायालय का या ऐसे दो या अधिक न्यायालयि का लगातार कम से कम दस वषर् तक अधविक्ता रहा है ; या (ग) राष्ट्रपति की राय मि पारं गत वधिविेिा है । स्पष्टकरिण 1–इस खंड मि , “उच्च न्यायालय” से वह उच्च न्यायालय अभपि्रेत है जो भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग मि अधिकारतिा का प्रयोग करता है, या इस संविधान के प्रारंभ से पहले किसी भी समय प्रयोग करता था । स्पष्टकरिण 2–इस खंड के प्रयोजन के लिए, किसी व्यक्ति के अधविक्ता रहने की अवधि की संगणना करने मि वह अवधि भी सम्मिलित की जाएगी जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने अधविक्ता होने के पश्चात ् ऐसा न्यायकी पद धारण किया है जो जिला न्यायाधीश के पद से अवर नहीं है । (4) उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक साबति कदाचार या असमथर्ता के आधार पर ऐसे हटाए जाने के लिए संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कु ल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा तथा उपसि्थत
Simple Meaning
अनुच्छेद 124 भारत के उच्चतम न्यायालय का 'जन्म प्रमाण-पत्र' है। यह देश की सर्वोच्च अदालत की स्थापना करता है और बताता है कि मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों को कैसे नियुक्त किया जाता है और उन्हें कैसे हटाया जा सकता है।
Explain Like Ten
यह नियम भारत के उच्चतम न्यायालय की स्थापना करता है — देश की सबसे बड़ी अदालत। यह बताता है कि राष्ट्रपति न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं, वे अत्यंत अनुभवी कानूनी विशेषज्ञ होने चाहिए, और वे 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर रह सकते हैं।
Student Mode
अनुच्छेद 124 भारत के उच्चतम न्यायालय की स्थापना करता है: (1) संरचना: भारत के मुख्य न्यायाधीश और संसद द्वारा विहित अन्य न्यायाधीश। (2) नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा अधिपत्र के जरिए। (3) अर्हताएं: भारत का नागरिक होना और किसी उच्च न्यायालय में 5 वर्ष न्यायाधीश रहे हों, या किसी उच्च न्यायालय में 10 वर्ष अधिवक्ता रहे हों, या राष्ट्रपति की दृष्टि में प्रतिष्ठित विधिवेत्ता हों। (4) कार्यकाल: 65 वर्ष की आयु तक। (5) पद से हटाना: दोनों सदनों में विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3) द्वारा 'सिद्ध कदाचार या असमर्थता' के आधार पर समावेदन पारित करने के बाद राष्ट्रपति द्वारा महाभियोग।
Example
जब भी भारत के किसी नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) की नियुक्ति होती है, तो वह अनुच्छेद 124 में निर्धारित नियमों के अनुसार ही होती है।
Key Takeaway
अनुच्छेद 124 यह सुनिश्चित करता है कि भारत में हमेशा एक शक्तिशाली और स्वतंत्र उच्चतम न्यायालय हो।
FAQs
उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यताएं क्या हैं?
व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए और निम्नलिखित में से एक अर्हता पूरी करनी चाहिए: (1) कम से कम 5 वर्ष किसी उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहे हों; या (2) कम से कम 10 वर्ष किसी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता रहे हों; या (3) राष्ट्रपति की दृष्टि में प्रतिष्ठित विधिवेत्ता हों।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को कैसे हटाया जाता है?
राष्ट्रपति द्वारा, जब दोनों सदनों में एक ही सत्र में विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3) से 'सिद्ध कदाचार या असमर्थता' के आधार पर समावेदन पारित हो।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु क्या है?
65 वर्ष।
Quiz
भारत के उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश कितनी आयु तक पद पर रहता है?
Answer: 65 वर्ष
अनुच्छेद 124 के तहत उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के महाभियोग के लिए कौन सा बहुमत आवश्यक है?
Answer: दोनों सदनों में विशेष बहुमत