Part V - Parliament • अनुच्छेद

अनुच्छेद 122 Simplified: संसद की कार्यवाहियों की जाँच न करना

अनुच्छेद 122 यह सुनिश्चित करता है कि न्यायालय संसद की आंतरिक कार्यवाहियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। यदि संसद में किसी प्रक्रिया संबंधी छोटी-सी गलती हो जाए, तो कोई भी न्यायालय उस आधार पर पारित कानून को रद्द नहीं कर सकता। संसद अपने घर की स्वामी स्वयं है।

Official Text

122. संसद की कार्यवाहियों की जाँच न करना—(1) संसद की किसी कार्यवाही की वैधता को किसी अभिकथित प्रक्रिया की अनियमितता के आधार पर किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा। (2) संसद का कोई पदाधिकारी या सदस्य जिसमें संसद की प्रक्रिया को विनियमित करने की अथवा कारबार संचालित करने की अथवा व्यवस्था बनाए रखने की शक्तियाँ निहित हैं, उन शक्तियों के संबंध में किसी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं होगा।

Simple Meaning

अनुच्छेद 122 यह सुनिश्चित करता है कि न्यायालय संसद की आंतरिक कार्यवाहियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। यदि संसद में किसी प्रक्रिया संबंधी छोटी-सी गलती हो जाए, तो कोई भी न्यायालय उस आधार पर पारित कानून को रद्द नहीं कर सकता। संसद अपने घर की स्वामी स्वयं है।

Explain Like Ten

जैसे राजनेता जजों के काम में दखल नहीं दे सकते, वैसे ही जज संसद की बहसों और कार्यवाहियों में दखल नहीं दे सकते। यदि संसद अपने वाद-विवाद के नियमों में कोई छोटी गलती करे, तो न्यायालय हस्तक्षेप करके उसे अवैध घोषित नहीं कर सकता। दोनों को एक-दूसरे के कार्यक्षेत्र का सम्मान करना होता है!

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अनुच्छेद 122 अपने दायरे में विधायी सर्वोच्चता की रक्षा करता है: (1) संसद की किसी भी कार्यवाही की वैधता को 'प्रक्रिया की अनियमितता' के आधार पर न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। (2) संसद में प्रक्रिया विनियमित करने, कारबार संचालित करने या व्यवस्था बनाए रखने की शक्ति रखने वाला कोई भी पदाधिकारी या सदस्य उन शक्तियों के संबंध में न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं है। महत्त्वपूर्ण: यह उन्मुक्ति केवल प्रक्रियागत अनियमितताओं तक सीमित है। यदि कोई मूलभूत संवैधानिक उल्लंघन या अवैधता हो, तो न्यायालय हस्तक्षेप कर सकते हैं (राजाराम पाल मामले में यही निर्णय दिया गया)।

Example

यदि लोकसभा में कोई विधेयक ध्वनिमत के बजाय मतविभाजन के बिना पारित हो जाए, तो कोई न्यायालय इस प्रक्रियागत कारण से उस कानून को अवैध नहीं ठहरा सकता, क्योंकि अनुच्छेद 122 न्यायालयों को संसद की आंतरिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने से रोकता है।

Key Takeaway

न्यायालय संसद की बहस और कार्यवाहियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

FAQs

क्या कोई नागरिक किसी संसदीय बहस नियम के उल्लंघन के आधार पर किसी कानून को न्यायालय में चुनौती दे सकता है?

नहीं। अनुच्छेद 122(1) के तहत न्यायालयों को केवल प्रक्रिया की अनियमितता के आधार पर संसदीय कार्यवाहियों पर सवाल उठाने से रोका गया है।

क्या अनुच्छेद 122 संसद को न्यायिक समीक्षा से पूर्ण छूट देता है?

नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अनुच्छेद 122 की उन्मुक्ति केवल 'प्रक्रिया की अनियमितता' तक सीमित है। यदि कार्यवाहियों में 'घोर अवैधता', असंवैधानिकता या मूल ढांचे का उल्लंघन हो, तो न्यायालय उनकी समीक्षा कर सकते हैं।

Quiz

न्यायालय संसदीय कार्यवाहियों की वैधता पर किस आधार पर सवाल नहीं उठा सकते?

Answer: प्रक्रिया की अनियमितता के आधार पर

अनुच्छेद 122(2) के तहत संसद में व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में कौन न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से मुक्त है?

Answer: प्रक्रिया विनियमित करने वाले अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी

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