Part V - Parliament • अनुच्छेद

अनुच्छेद 118 Simplified: प्रक्रिया के नियम

अनुच्छेद 118 संसद के प्रत्येक सदन (लोकसभा और राज्यसभा) को अपनी खुद की 'नियम पुस्तिका' बनाने का अधिकार देता है। वे स्वयं तय करते हैं कि संसद में बहस कितनी देर चलेगी, प्रश्न कैसे पूछे जाएंगे (प्रश्नकाल), और सदस्यों का व्यवहार कैसा होगा। कार्यपालिका इसमें दखल नहीं दे सकती।

Official Text

118. प्रक्रिया के नियम—(1) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संसद का प्रत्येक सदन अपनी प्रक्रिया और अपने कार्य संचालन के विनियमन के लिए नियम बना सकेगा। (2) जब तक खंड (1) के अधीन नियम नहीं बनाए जाते हैं तब तक इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत डोमिनियन के विधान-मंडल के संबंध में जो प्रक्रिया के नियम और स्थायी आदेश प्रवृत्त थे वे ऐसे उपांतरणों और अनुकूलनों के अधीन रहते हुए संसद के संबंध में प्रभावी होंगे जिन्हें, यथास्थिति, राज्यसभा का सभापति या लोकसभा का अध्यक्ष उनमें करे। (3) राष्ट्रपति, राज्यसभा के सभापति और लोकसभा के अध्यक्ष से परामर्श करने के पश्चात्, दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों से संबंधित और उनमें परस्पर संचार से संबंधित प्रक्रिया के नियम बना सकेगा। (4) दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में लोकसभा का अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में ऐसा व्यक्ति पीठासीन होगा जिसका खंड (3) के अधीन बनाई गई प्रक्रिया के नियमों के अनुसार अवधारण किया जाए।

Simple Meaning

अनुच्छेद 118 संसद के प्रत्येक सदन (लोकसभा और राज्यसभा) को अपनी खुद की 'नियम पुस्तिका' बनाने का अधिकार देता है। वे स्वयं तय करते हैं कि संसद में बहस कितनी देर चलेगी, प्रश्न कैसे पूछे जाएंगे (प्रश्नकाल), और सदस्यों का व्यवहार कैसा होगा। कार्यपालिका इसमें दखल नहीं दे सकती।

Explain Like Ten

मान लीजिए कि संसद एक बहुत बड़ा डिबेट क्लब है। अनुच्छेद 118 कहता है कि इस क्लब के सदस्य खुद अपने नियम लिख सकते हैं कि कौन कब बोलेगा, नियमों का पालन कौन कराएगा और क्लब कैसे चलेगा। यह भी तय है कि जब दोनों सदन एक साथ मिलेंगे तो लोकसभा के अध्यक्ष ही लीडर होंगे।

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अनुच्छेद 118 विधायी स्वायत्तता और प्रक्रियात्मक स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है: (1) संसद के प्रत्येक सदन को अपनी प्रक्रिया और कार्य संचालन को विनियमित करने के लिए नियम बनाने का अधिकार है। (2) राष्ट्रपति दोनों सदनों के सभापति और अध्यक्ष की सलाह पर संयुक्त बैठकों (Joint Sittings) और सदनों के बीच संचार के नियम बना सकते हैं। (3) अत्यंत महत्वपूर्ण: अनुच्छेद 118(4) के अनुसार, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता सदैव लोकसभा का अध्यक्ष (Speaker of Lok Sabha) करता है।

Example

अनुच्छेद 118 के तहत बने नियमों के अनुसार, हर बैठक का पहला घंटा मंत्रियों से सवाल पूछने (प्रश्नकाल/Question Hour) और उसके बाद का समय लोक महत्व के तात्कालिक मुद्दे उठाने (शून्यकाल/Zero Hour) के लिए आरक्षित होता है।

Key Takeaway

संसद का प्रत्येक सदन अपने आंतरिक कार्यों और नियमों को चलाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

FAQs

यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित हों, तो संसद की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?

संयुक्त बैठक के नियमों के अनुसार, अध्यक्ष की अनुपस्थिति में लोकसभा के उपाध्यक्ष अध्यक्षता करते हैं। यदि वे भी अनुपस्थित हों, तो राज्यसभा के उपसभापति पीठासीन होते हैं। ध्यान दें कि राज्यसभा के पदेन सभापति (उपराष्ट्रपति) कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते हैं।

क्या अदालतें संसद द्वारा बनाए गए प्रक्रिया के नियमों में हस्तक्षेप कर सकती हैं?

नहीं। अनुच्छेद 122 के तहत, अदालतों को संसद की किसी भी कार्यवाही की वैधता पर 'प्रक्रिया की अनियमितता' के आधार पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।

प्रश्नकाल (Question Hour) और शून्यकाल (Zero Hour) क्या हैं?

प्रश्नकाल संसद सत्र की बैठक का पहला घंटा होता है जिसमें सांसद मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं। शून्यकाल प्रश्नकाल के ठीक बाद का समय होता है जिसमें सांसद बिना पूर्व सूचना के अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे उठा सकते हैं। ये दोनों प्रक्रियाएं अनुच्छेद 118 के नियमों के तहत चलती हैं।

Quiz

अनुच्छेद 118(4) के अनुसार, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?

Answer: लोकसभा के अध्यक्ष

संसद के प्रत्येक सदन को अपने आंतरिक कार्य संचालन के नियम बनाने की शक्ति कौन सा अनुच्छेद प्रदान करता है?

Answer: अनुच्छेद 118

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