Part V - Parliament • अनुच्छेद

अनुच्छेद 113 Simplified: संसद में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया

अनुच्छेद 113 यह बताता है कि बजट पर मतदान कैसे होता है। कुछ खर्च (जैसे राष्ट्रपति का वेतन) 'भारित' (Charged) होते हैं और उन पर वोट नहीं डाला जा सकता—वे पहले से ही सुरक्षित हैं। अन्य खर्चों (जैसे सड़कों या स्कूलों के लिए) को लोकसभा के सामने 'अनुदान की मांगों' के रूप में पेश किया जाता है, जिन पर लोकसभा में वोटिंग होती है।

Official Text

113. संसद में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया—(1) प्राक्कलनों में से जितने प्राक्कलन भारत की संचित निधि पर भारित व्यय से संबंधित हैं वे संसद में मतदान के लिए नहीं रखे जाएंगे, किन्तु इस खंड की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह संसद के किसी सदन में उन प्राक्कलनों में से किसी प्राक्कलन पर चर्चा को निवारित करती है। (2) उक्त प्राक्कलनों में से जितने प्राक्कलन अन्य व्यय से संबंधित हैं वे लोकसभा के समक्ष अनुदानों की मांगों के रूप में रखे जाएंगे और लोकसभा को शक्ति होगी कि वह किसी मांग को अनुमति दे या अनुमति देने से इनकार कर दे अथवा किसी मांग को, उसमें विनिर्दिष्ट रकम को कम करके, अनुमति दे। (3) किसी अनुदान की मांग राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही की जाएगी, अन्यथा नहीं।

Simple Meaning

अनुच्छेद 113 यह बताता है कि बजट पर मतदान कैसे होता है। कुछ खर्च (जैसे राष्ट्रपति का वेतन) 'भारित' (Charged) होते हैं और उन पर वोट नहीं डाला जा सकता—वे पहले से ही सुरक्षित हैं। अन्य खर्चों (जैसे सड़कों या स्कूलों के लिए) को लोकसभा के सामने 'अनुदान की मांगों' के रूप में पेश किया जाता है, जिन पर लोकसभा में वोटिंग होती है।

Explain Like Ten

जब सरकार को स्कूल या सड़कें बनाने के लिए पैसे चाहिए होते हैं, तो वे अपनी मांगों को लोकसभा के सामने रखते हैं। लोकसभा हाँ कह सकती है, ना कह सकती है, या पैसे कम करने को कह सकती है। लेकिन वे न्यायाधीशों के वेतन जैसी सुरक्षित चीजों पर वोट नहीं डाल सकते।

Student Mode

अनुच्छेद 113 बजट प्राक्कलनों की संसदीय प्रक्रिया को नियंत्रित करता है: (1) संचित निधि पर भारित व्यय (अनुच्छेद 112(3)) पर मतदान नहीं होता, लेकिन दोनों सदनों में इस पर चर्चा की जा सकती है। (2) गैर-भारित व्यय लोकसभा के समक्ष 'अनुदानों की मांगों' के रूप में रखे जाते हैं। राज्यसभा को इन मांगों पर मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है। (3) लोकसभा किसी मांग को स्वीकार, अस्वीकार या कम (कटौती प्रस्तावों के माध्यम से) कर सकती है, लेकिन वह मांग की राशि को बढ़ा नहीं सकती। (4) कोई भी अनुदान मांग राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना प्रस्तुत नहीं की जा सकती (अनुच्छेद 113(3))।

Example

जब सरकार बजट पेश करती है, तो लोकसभा विभिन्न मंत्रालयों (जैसे रक्षा या शिक्षा) के बजट के लिए वोटिंग करती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के वेतन पर वे वोट नहीं डाल सकते, क्योंकि वे भारित व्यय हैं।

Key Takeaway

लोकसभा के पास सरकार के खर्च करने के अनुरोधों को स्वीकार या अस्वीकार करने की शक्ति है।

FAQs

क्या राज्यसभा अनुदान की मांगों पर मतदान कर सकती है?

नहीं। अनुच्छेद 113(2) के तहत, अनुदान की मांगें केवल लोकसभा (जनता के सदन) के समक्ष मतदान के लिए रखी जाती हैं। राज्यसभा केवल इन प्राक्कलनों पर चर्चा कर सकती है, मतदान नहीं।

क्या संसद किसी अनुदान की मांग की राशि को बढ़ा सकती है?

नहीं। लोकसभा किसी अनुदान की मांग को स्वीकार कर सकती है, अस्वीकार कर सकती है, या कटौती प्रस्तावों (Cut Motions) द्वारा उसे कम कर सकती है, लेकिन राशि को बढ़ा नहीं सकती।

अनुदान की मांग के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश क्यों आवश्यक है?

यह सार्वजनिक वित्त पर कार्यपालिका की जिम्मेदारी सुनिश्चित करता है, ताकि कोई भी सांसद अपनी मर्जी से मनमाने खर्च की मांग का प्रस्ताव न रख सके।

Quiz

अनुच्छेद 113 के तहत अनुदान की मांगें मतदान के लिए विशेष रूप से कहाँ रखी जाती हैं?

Answer: लोकसभा में

लोकसभा किसी अनुदान की मांग पर निम्नलिखित में से कौन सी कार्रवाई नहीं कर सकती?

Answer: मांग को बढ़ाना

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