Part V - Parliament • अनुच्छेद
अनुच्छेद 111 Simplified: विधेयकों पर अनुमति
अनुच्छेद 111 राष्ट्रपति के 'हस्ताक्षर' के बारे में है। संसद से पास होने के बाद कोई भी विधेयक तब तक कानून नहीं बनता जब तक राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर (अनुमति) न कर दें। राष्ट्रपति के पास तीन विकल्प होते हैं: (1) अनुमति देना (कानून बनाना), (2) अनुमति रोकना (विधेयक को समाप्त करना), या (3) पुनर्विचार के लिए संसद को वापस भेजना। लेकिन यदि संसद उसे दोबारा पास करके भेजती है, तो राष्ट्रपति को हस्ताक्षर करने ही होंगे।
Official Text
111. विधेयकों पर अनुमति—जब कोई विधेयक संसद के सदनों द्वारा पारित कर दिया गया है तब वह राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और राष्ट्रपति घोषित करेगा कि वह विधेयक पर अनुमति देता है या अनुमति रोक लेता है: परन्तु राष्ट्रपति अनुमति के लिए अपने समक्ष विधेयक प्रस्तुत किए जाने के पश्चात यथाशीघ्र उस विधेयक को, यदि वह धन विधेयक नहीं है तो, सदनों को इस संदेश के साथ लौटा सकेगा कि वे विधेयक पर या उसके किन्हीं विनिर्दिष्ट उपबंधों पर पुनर्विचार करें और विशिष्टतया किन्हीं ऐसे संशोधनों के पुरःस्थापन की वांछनीयता पर विचार करें जिनकी उसने अपने संदेश में सिफारिश की है और जब विधेयक इस प्रकार लौटा दिया जाता है तब सदन विधेयक पर तदनुसार पुनर्विचार करेंगे और यदि विधेयक सदनों द्वारा संशोधन सहित या उसके बिना फिर से पारित कर दिया जाता है और राष्ट्रपति के समक्ष अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाता है तो राष्ट्रपति उस पर अनुमति नहीं रोकेगा।
Simple Meaning
अनुच्छेद 111 राष्ट्रपति के 'हस्ताक्षर' के बारे में है। संसद से पास होने के बाद कोई भी विधेयक तब तक कानून नहीं बनता जब तक राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर (अनुमति) न कर दें। राष्ट्रपति के पास तीन विकल्प होते हैं: (1) अनुमति देना (कानून बनाना), (2) अनुमति रोकना (विधेयक को समाप्त करना), या (3) पुनर्विचार के लिए संसद को वापस भेजना। लेकिन यदि संसद उसे दोबारा पास करके भेजती है, तो राष्ट्रपति को हस्ताक्षर करने ही होंगे।
Explain Like Ten
जब लोक सभा और राज्य सभा मिलकर एक नया नियम लिख लेते हैं, तो वे इसे हस्ताक्षर के लिए देश के राष्ट्रपति के पास भेजते हैं। राष्ट्रपति नियम को मंजूर कर सकते हैं, उसे रोक सकते हैं, या बदलावों के सुझाव के साथ संसद को वापस भेज सकते हैं। लेकिन यदि संसद उसे दोबारा पास करके राष्ट्रपति को भेजती है, तो राष्ट्रपति को उस पर हस्ताक्षर करने ही पड़ते हैं।
Student Mode
अनुच्छेद 111 विधेयक प्रस्तुत किए जाने पर राष्ट्रपति की शक्तियों (Veto Powers) को नियंत्रित करता है: (1) अनुमति देना (विधेयक अधिनियम बन जाता है); (2) अनुमति रोकना (विधेयक समाप्त हो जाता है); (3) पुनर्विचार के लिए वापस भेजना (निलंबनकारी वीटो - केवल गैर-धन विधेयकों पर)। यदि संसद पुनः विधेयक पारित कर दे, तो राष्ट्रपति अनुमति देने के लिए बाध्य हैं। चूंकि संविधान में कोई समय सीमा नहीं दी गई है, इसलिए राष्ट्रपति विधेयक को अनिश्चितकाल के लिए लंबित रख सकते हैं, जिसे 'पॉकेट वीटो' (Pocket Veto) कहा जाता है।
Example
यदि संसद कोई विवादित कानून पास करती है, तो राष्ट्रपति उसे वापस विचार के लिए भेज सकते हैं। यदि सरकार अडिग रहती है और संसद उसे दोबारा ज्यों का त्यों पास कर देती है, तो राष्ट्रपति उसे रोकने के लिए बाध्य नहीं रह जाते और उन्हें मंजूरी देनी ही पड़ती है।
Key Takeaway
राष्ट्रपति किसी भी विधेयक को कानून में बदलने वाली अंतिम हस्ताक्षरकर्ता शक्ति हैं।
FAQs
क्या राष्ट्रपति धन विधेयक (Money Bill) को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकते हैं?
नहीं। अनुच्छेद 111 के तहत राष्ट्रपति धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए संसद को वापस नहीं लौटा सकते। वे या तो इसे अनुमति दे सकते हैं या अनुमति रोक सकते हैं (आमतौर पर वे इसे अनुमति दे देते हैं क्योंकि यह उनकी पूर्व सिफारिश से ही पेश होता है)।
यदि राष्ट्रपति किसी विधेयक को वापस भेजते हैं और संसद उसे पुनः पारित कर देती है, तो क्या होता है?
अनुच्छेद 111 के अनुसार, यदि संसद उस विधेयक को बिना किसी बदलाव के भी दोबारा पारित कर राष्ट्रपति के पास भेजती है, तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति रोकने के अधिकारी नहीं होते और उन्हें मंजूरी देनी ही होती है।
पॉकेट वीटो (Pocket Veto) क्या है?
चूंकि अनुच्छेद 111 में राष्ट्रपति द्वारा निर्णय लेने की कोई समय सीमा तय नहीं की गई है ('यथाशीघ्र' लिखा है), इसलिए राष्ट्रपति किसी विधेयक को न तो खारिज करते हैं और न ही पुनर्विचार के लिए लौटाते हैं, बल्कि उसे अनिश्चितकाल के लिए अपने पास लंबित रख लेते हैं। इसे पॉकेट वीटो कहा जाता है।
Quiz
यदि राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार के लिए लौटाए गए विधेयक को संसद दोबारा पारित करके भेजती है, तो राष्ट्रपति:
Answer: उन्हें अपनी अनुमति (हस्ताक्षर) देनी ही होगी
अनुच्छेद 111 के तहत राष्ट्रपति किस प्रकार के विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकते?
Answer: धन विधेयक (Money Bill)