Part V - Parliament • अनुच्छेद
अनुच्छेद 108 Simplified: कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
अगर संसद के दोनों सदनों (लोक सभा और राज्य सभा) के बीच किसी कानून को लेकर गतिरोध (झगड़ा) पैदा हो जाता है, तो राष्ट्रपति 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) बुला सकते हैं। इसमें दोनों सदनों के सदस्य एक साथ बैठकर वोट डालते हैं। चूंकि लोक सभा के सदस्यों की संख्या राज्य सभा से दोगुनी से भी अधिक है, इसलिए संयुक्त बैठक में आमतौर पर लोक सभा की ही जीत होती है।
Official Text
108. कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक—(1) यदि किसी विधेयक के एक सदन द्वारा पारित किए जाने और दूसरे सदन को पारेषित किए जाने के पश्चात— (क) दूसरे सदन द्वारा विधेयक अस्वीकार कर दिया गया है, या (ख) विधेयक में किए जाने वाले संशोधनों के बारे में दोनों सदन अंतिम रूप से असहमत हो गए हैं, या (ग) दूसरे सदन को विधेयक प्राप्त होने की तारीख से उसके द्वारा विधेयक पारित किए बिना छह मास से अधिक बीत गए हैं, तो उस दशा के सिवाय, जिसमें लोक सभा का विघटन होने के कारण विधेयक व्यपगत हो गया है, राष्ट्रपति विधेयक पर विचार-विमर्श करने और मत देने के प्रयोजन के लिए सदनों को संयुक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत करने के अपने आशय की सूचना, यदि वे बैठक में हैं तो संदेश द्वारा या यदि वे बैठक में नहीं हैं तो लोक अधिसूचना द्वारा देगा: परन्तु इस खंड की कोई बात धन विधेयक को लागू नहीं होगी। (2) छह मास की ऐसी अवधि की गणना करने में, जो खंड (1) में निर्दिष्ट है, किसी ऐसी अवधि को हिसाब में नहीं लिया जाएगा जिसमें उक्त खंड के उपखंड (ग) में निर्दिष्ट सदन सत्रावसित या निरंतर चार से अधिक दिनों के लिए स्थगित कर दिया जाता है। (3) यदि राष्ट्रपति ने खंड (1) के अधीन सदनों को संयुक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत करने के अपने आशय की सूचना दे दी है तो कोई भी सदन विधेयक पर आगे कार्यवाही नहीं करेगा, किन्तु राष्ट्रपति अपनी अधिसूचना की तारीख के पश्चात किसी समय सदनों को अधिसूचना में विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए संयुक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत कर सकेगा और, यदि वह ऐसा करता है तो, सदन तदनुसार अधिवेशित होंगे। (4) यदि सदनों की संयुक्त बैठक में विधेयक ऐसे संशोधनों सहित, यदि कोई हों, जिन पर संयुक्त बैठक में सहमति हो जाती है, दोनों सदनों के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों की कुल संख्या के बहुमत द्वारा पारित हो जाता है तो इस संविधान के प्रयोजनों के लिए वह दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया समझा जाएगा: परन्तु संयुक्त बैठक में— (क) यदि विधेयक एक सदन से पारित किए जाने पर दूसरे सदन द्वारा संशोधनों सहित पारित नहीं कर दिया गया है और उस सदन को, जिसमें उसका आरंभ हुआ था, लौटा नहीं दिया गया है तो ऐसे संशोधनों से भिन्न (यदि कोई हों), जो विधेयक के पारित होने में देरी के कारण आवश्यक हो गए हैं, विधेयक में कोई और संशोधन प्रस्थापित नहीं किया जाएगा;
Simple Meaning
अगर संसद के दोनों सदनों (लोक सभा और राज्य सभा) के बीच किसी कानून को लेकर गतिरोध (झगड़ा) पैदा हो जाता है, तो राष्ट्रपति 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) बुला सकते हैं। इसमें दोनों सदनों के सदस्य एक साथ बैठकर वोट डालते हैं। चूंकि लोक सभा के सदस्यों की संख्या राज्य सभा से दोगुनी से भी अधिक है, इसलिए संयुक्त बैठक में आमतौर पर लोक सभा की ही जीत होती है।
Explain Like Ten
मान लीजिए कि लोक सभा और राज्य सभा एक नए नियम पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं—एक कहता है 'हाँ', दूसरा कहता है 'नहीं'। ऐसे में राष्ट्रपति दोनों सदनों के सभी सांसदों को एक बड़े हॉल में एक साथ बैठने के लिए कहते हैं, जिसे संयुक्त बैठक कहते हैं। वहां सब मिलकर वोट देते हैं। चूंकि लोक सभा में बहुत ज्यादा सदस्य (543) होते हैं और राज्यसभा में कम (~245), इसलिए ज्यादातर लोक सभा की मर्जी ही चलती है।
Student Mode
अनुच्छेद 108 संसद के दोनों सदनों के बीच विधायी गतिरोध को दूर करने के लिए संयुक्त बैठक का प्रावधान करता है। गतिरोध की तीन स्थितियां: (1) एक सदन द्वारा पारित विधेयक को दूसरे सदन द्वारा खारिज करना, (2) संशोधनों पर असहमति, (3) दूसरे सदन द्वारा बिना पारित किए 6 महीने से अधिक समय बीत जाना। बैठक की अध्यक्षता लोक सभा का अध्यक्ष करता है। निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से होता है। यह नियम धन विधेयकों और संविधान संशोधन विधेयकों पर लागू नहीं होता।
Example
भारतीय इतिहास में संयुक्त बैठक बहुत दुर्लभ रही है। इसका उपयोग केवल तीन बार किया गया है, जैसे दहेज प्रतिषेध अधिनियम (1961) और पोटा (POTA) अधिनियम (2002) को पारित करने के लिए।
Key Takeaway
संयुक्त बैठक दोनों सदनों के बीच गतिरोध को दूर करने का अंतिम संवैधानिक माध्यम है।
FAQs
संसद की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?
संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोक सभा के अध्यक्ष (Speaker) द्वारा की जाती है। उनकी अनुपस्थिति में लोक सभा के उपाध्यक्ष और उनके भी न होने पर राज्य सभा के उपसभापति इसकी अध्यक्षता करते हैं (राज्यसभा के सभापति कभी इसकी अध्यक्षता नहीं करते)।
क्या धन विधेयक (Money Bill) के लिए संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है?
नहीं। अनुच्छेद 108 स्पष्ट रूप से धन विधेयकों को संयुक्त बैठक की प्रक्रिया से बाहर रखता है। धन विधेयक के संबंध में लोक सभा का निर्णय अंतिम होता है।
भारत में अब तक कितनी बार संयुक्त बैठक बुलाई गई है?
केवल तीन बार: दहेज प्रतिषेध विधेयक (1961), बैंकिंग सेवा आयोग (निरसन) विधेयक (1978), और आतंकवाद निवारण विधेयक (POTA - 2002) के लिए।
Quiz
अनुच्छेद 108 के तहत संसद की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?
Answer: लोक सभा के अध्यक्ष
निम्नलिखित में से किस विधेयक के लिए संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती?
Answer: धन विधेयक (Money Bill) के लिए