Part V - Parliament • अनुच्छेद

अनुच्छेद 103 Simplified: सदस्यों की निरहर्ताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय

यदि किसी सांसद पर अयोग्य होने का आरोप लगता है (जैसे लाभ का पद धारण करना), तो उस पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति करते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति को पहले चुनाव आयोग (Election Commission) से सलाह लेनी होगी और चुनाव आयोग जो भी राय देगा, राष्ट्रपति उसी के अनुसार काम करेंगे।

Official Text

[103 . सदस्य की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय–(1) यदि यह प्रश्न उठता है की संसद के किसी सदन का कोई सदस्य अनुच्छेद 102 के खंड (1) मि वर्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो गया है या नहीं तो वह प्रश्न राष्ट्रपति को विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतमि होगा । ू चति नहीं की गई) इस प्रकार पढ़े जाने के लिए प्रतिस्थापित किया गया है : "(क) यदि वह भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई ऐसा लाभ का पद धारण करता है, जिसे संसद ने विधि द्वारा उसके धारक को नरिहरि्त घोषति किया है" । इस संशोधन का संविधान (चवालीसवें संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 45 द्वारा (20-6-1979 से) लोप कर दिया गया । ु च्छेद के प्रयोजनों के लिए” के स्थान पर प्रतिस्थापित । ु ् च्छेद 103 के स्थान पर प्रतिस्थापित और तत्पश्चात ् संविधान (चवालीसवें संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 14 द्वारा (20- 6-1979 से) अनु ् च्छेद 103 के स्थान पर प्रतिस्थापित । (2) ऐसे किसी प्रश्न पर विनिश्चय करने के पहले राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग की राय लेगा और ऐसी राय के अनु सार कार्य करेगा ।]

Simple Meaning

यदि किसी सांसद पर अयोग्य होने का आरोप लगता है (जैसे लाभ का पद धारण करना), तो उस पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति करते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति को पहले चुनाव आयोग (Election Commission) से सलाह लेनी होगी और चुनाव आयोग जो भी राय देगा, राष्ट्रपति उसी के अनुसार काम करेंगे।

Explain Like Ten

अनुच्छेद 103 कहता है कि यदि इस बात पर झगड़ा होता है कि कोई सांसद अयोग्य है या नहीं, तो राष्ट्रपति इसका अंतिम फैसला करेंगे। लेकिन फैसला लेने से पहले वे चुनाव आयोग से पूछेंगे और उनकी बात को मानना राष्ट्रपति के लिए अनिवार्य है।

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यह अनुच्छेद अनिवार्य करता है कि सांसदों की अयोग्यता (अनुच्छेद 102(1) के तहत) से संबंधित प्रश्नों को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग (ECI) की राय लेने और उसके अनुसार ही कार्य करने के लिए बाध्य हैं। ध्यान दें कि दल-बदल (10वीं अनुसूची) से जुड़े मामलों का निर्णय राष्ट्रपति नहीं बल्कि सदन के अध्यक्ष/सभापति करते हैं।

Example

यदि किसी सांसद के लाभ के पद पर होने को लेकर विवाद होता है, तो मामला सीधे कोर्ट जाने के बजाय राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है, जो चुनाव आयोग की सलाह पर अंतिम निर्णय लेते हैं।

Key Takeaway

किसी सांसद की अयोग्यता का अंतिम निर्णय राष्ट्रपति और चुनाव आयोग मिलकर करते हैं।

FAQs

क्या राष्ट्रपति का फैसला सांसदों की अयोग्यता पर अंतिम होता है?

हाँ, अनुच्छेद 103(1) के तहत राष्ट्रपति का निर्णय अंतिम और कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है, बशर्ते वह निर्वाचन आयोग की राय पर आधारित हो।

सांसदों की अयोग्यता पर निर्णय लेने से पहले राष्ट्रपति को किससे सलाह लेनी होती है?

राष्ट्रपति को भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) से परामर्श करना होता है और निर्वाचन आयोग की राय के अनुसार ही निर्णय देना होता है।

Quiz

अनुच्छेद 103 के तहत किसी सांसद की अयोग्यता पर अंतिम निर्णय कौन लेता है?

Answer: भारत के राष्ट्रपति

सांसदों की अयोग्यता तय करते समय राष्ट्रपति के लिए किसकी राय बाध्यकारी होती है?

Answer: निर्वाचन आयोग (चुनाव आयोग)

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